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Kashmir में कभी शाम 7 बजे सन्नाटा पसर जाता था, मगर Modi ने माहौल बदल कर रख दिया, जमकर मना नये साल का जश्न

कश्मीर का लाल चौक, जहां कभी शाम सात बजे के बाद सन्नाटा पसर जाया करता था, वह इलाका 31 दिसंबर 2025 की रात बिल्कुल बदला-बदला नजर आया। नववर्ष के स्वागत में देर रात तक जश्न चला, बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए सैलानी सड़कों पर उमड़े और रोशनी, संगीत व उल्लास के बीच नए साल का अभिनंदन किया गया। इस ऐतिहासिक बदलाव के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। हर ओर सुरक्षा बलों की तैनाती, सतर्क निगरानी और सख्त जांच व्यवस्था यह संदेश दे रही थी कि शांति और जश्न में खलल डालने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हम आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में आतंक के मंसूबों को कुचलने के लिए सुरक्षा बल पूरी ताकत से मोर्चे पर डटे हुए हैं। चिनाब घाटी से लेकर कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सतर्कता की सख्त चादर बिछा दी गई है। संदेश साफ है कि जश्न के माहौल को बिगाड़ने की किसी भी साजिश को जड़ में ही कुचल दिया जाएगा। चिनाब घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों यानि डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह से सटे उधमपुर, रियासी और कठुआ में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने निगरानी कई गुना बढ़ा दी है। कभी आतंकियों के लिए शरणस्थली रहे बर्फ से ढके दुर्गम पहाड़ अब उनके लिए काल साबित हो रहे हैं।

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हम आपको यह भी बता दें कि खुफिया आकलन के अनुसार जम्मू क्षेत्र के जंगलों में 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऊपरी दर्रे बंद होने से पहले आतंकियों के निचले इलाकों की ओर खिसकने की आशंका को देखते हुए उच्च, मध्य और ऊपरी पर्वतीय क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पिछले सप्ताह से चिनाब घाटी के साथ-साथ राजौरी और पुंछ में भी बड़े पैमाने पर आतंकवाद-रोधी अभियान जारी हैं। सुरक्षा बलों का फोकस स्पष्ट है कि आतंकियों को सांस लेने का मौका नहीं देना है और उनके सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आतंकी मौसम और भूगोल का फायदा उठाकर नववर्ष के दौरान वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं, इसी कारण हर संभावित रास्ते पर पहरा कसा गया है। घाटी के भीतर, खासकर पर्यटन स्थलों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। श्रीनगर सहित सभी प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदुओं पर वाहनों की गहन जांच, बढ़ी हुई गश्त और सख्त निगरानी जारी है। जहां-जहां नववर्ष समारोह हो रहे हैं, वहां सुरक्षा बलों की भारी तैनाती सुनिश्चित की गई है।
इसी बीच, कठुआ जिले से आतंक के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार की खबर सामने आई है। वर्ष 2025 के दौरान 39 ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) की पहचान की गई, जिनमें से 18 पर नागरिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत कार्रवाई हुई। हम आपको बता दें कि ये वो चेहरे हैं जो सीधे हथियार नहीं उठाते, लेकिन आतंक को जिंदा रखने के लिए पैसा, ठिकाना और सूचनाएं मुहैया कराते हैं। आतंकवाद से जुड़े चार मामलों में सात गिरफ्तारियां और दो आतंकियों का सफाया यह दर्शाता है कि कार्रवाई केवल मोर्चे पर नहीं, बल्कि जड़ों तक पहुंच रही है। भद्रवाह से विधायक दलीप सिंह परिहार ने कहा कि लोग अगर शांतिपूर्वक नववर्ष मना पा रहे हैं, तो यह सेना और पुलिस के निरंतर त्याग और बलिदान का परिणाम है।


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