राजधानी लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। गांवों को सीधे ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ने की योजना अब जमीन पर उतरने के करीब है। अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो मई से इन रूट्स पर मिनी बसें चलनी शुरू हो जाएंगी। अभी तक जिन गांवों में लोगों को शहर पहुंचने के लिए कई बार वाहन बदलना पड़ता था, वहां अब सीधी बस सेवा मिलने की तैयारी है। 42 आवेदन, निजी ऑपरेटरों की दिलचस्पी लखनऊ क्षेत्र से इस योजना के तहत 42 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो यह दिखाता है कि निजी बस संचालक भी ग्रामीण रूट्स पर उतरने के लिए तैयार हैं। खासतौर पर उन इलाकों में इस योजना का ज्यादा असर दिखेगा, जहां सड़क तो मौजूद है लेकिन नियमित परिवहन की सुविधा नहीं है। नई व्यवस्था के तहत गांवों को सीधे विकास खंड, तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीणों को सरकारी दफ्तर, अस्पताल, बाजार और शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में आसानी होगी। छोटी बसें चलेंगी, खाली रूट्स पर फोकस इस योजना में 15 से 28 सीट वाली मिनी बसें चलाई जाएंगी, ताकि कम यात्री वाले रूट्स पर भी सेवा दी जा सके। परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक, इन बसों को खासतौर पर उन मार्गों पर उतारा जाएगा जहां अभी परिवहन निगम की बसें नहीं पहुंच पातीं या बहुत कम चलती हैं। लखनऊ के बाद पूरे प्रदेश में विस्तार लखनऊ में शुरुआत के बाद यही मॉडल पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा। परिवहन विभाग को प्रदेश के 20 क्षेत्रों से 1000 से ज्यादा आवेदन मिले हैं, जिससे साफ है कि योजना को लेकर पूरे राज्य में तैयारी चल रही है। सहारनपुर, प्रयागराज, वाराणसी और अलीगढ़ जैसे कई जिलों से बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं, जो दिखाता है कि ग्रामीण परिवहन को लेकर मांग हर जगह है। पहले चरण में 12 हजार गांव, आगे बड़ा लक्ष्य पहले चरण में करीब 12,200 गांवों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है। इसके बाद धीरे-धीरे प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने की योजना है। इसका मकसद साफ है ऐसे गांव, जो अब तक परिवहन से कटे रहे, उन्हें सीधे मुख्यधारा से जोड़ना।

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