बसपा सुप्रीमो मायावती एक बार फिर लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन करेंगी। 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती पर प्रदेशभर से बसपा कार्यकर्ताओं को बुलाया गया है। यह कार्यक्रम पिछले साल 9 अक्टूबर को कांशीराम के परिनिर्वाण पर आयोजित रैली की तरह होगा, जिसमें 4-5 लाख की भीड़ जुटने का अनुमान है। मंगलवार को बसपा सुप्रीमो ने लखनऊ में पार्टी कार्यालय में 250 नेताओं के साथ डेढ़ घंटे तक बैठक की। उन्होंने जिलाध्यक्षों और मंडल कोऑर्डिनेटरों को विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता बीएसपी को काफी उम्मीद भरी नजरों से देख रही है, इसलिए निष्ठा, लगन और मेहनत की जरूरत है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मायावती ने कहा- यूपी में रोटी-रोजी की पहले से जटिल समस्या अब और भी विकट होती जा रही है। सरकारें ज्यादातर मामलों में अब भी जुमलेबाजी और वादों के जरिए लोगों की भूख-प्यास मिटाने की कोशिश कर रही हैं, जो दुखद है। पार्टी में आपराधिक तत्वों को किसी भी हालत में जगह न दी जाए।। मायावती की 3 बड़ी बातें- 1- मुट्ठी भर सत्ताधारियों तक विकास सीमित रहेगा तो जनता का भला कैसे होगा
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि देश क्या सिर्फ प्राइवेट सेक्टर पर ज्यादा निर्भर होकर आत्मनिर्भर बन सकता है? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विकास का फायदा कुछ मुट्ठी भर सत्ताधारी लोगों तक सीमित रहेगा तो आम जनता का भला कैसे होगा। 2- जंग से रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े, सरकार ठोस कदम उठाए
अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि इसकी वजह से रसोई गैस, पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो गए हैं। इससे रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े हैं। सबसे ज्यादा असर गरीब और मेहनतकश लोगों पर पड़ा है। उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकार को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि देश को नोटबंदी या कोरोना महामारी जैसी स्थिति का फिर से सामना न करना पड़े। आत्मनिर्भरता को सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीन पर सच बनाना जरूरी है। 3- केंद्र कमजोर वर्गों की महिलाओं को अलग से आरक्षण देने पर विचार करे
महिला आरक्षण को लेकर मायावती ने कहा कि अगर कमजोर वर्गों की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं मिलेगा, तो उनका सही विकास कैसे होगा। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। 9 अक्टूबर के बाद मायावती ने की 10 मीटिंग
यूपी में 2022 विधानसभा में एक सीट पर सिमटने के बाद 2027 के लिए बसपा आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के एक सीनियर नेता कहते हैं- 9 अक्टूबर 2025 के बाद से अब तक मायावती पार्टी नेताओं के साथ 10 मीटिंग कर चुकी हैं। उनका जोर इस बात पर है कि बसपा का जो कोर वोट बैंक है, वह पार्टी से दूर न जाए। इसकी 3 वजह हैं- 1- यूपी में कांग्रेस का फोकस एक बार फिर दलित वोट बैंक की तरफ हुआ है। 13 मार्च को कांशीराम जयंती से ठीक दो दिन पहले राहुल गांधी ने लखनऊ में दलित नेताओं के साथ मीटिंग की। इसमें कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की। 2- पश्चिमी यूपी बसपा का गढ़ माना जाता रहा है। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर लगातार दलित वोटबैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं। वहां लगातार रैलियां कर रहे हैं। 3- सपा ने भी कांशीराम जयंती पर पूरे प्रदेश में जगह-जगह कार्यक्रम किए थे। अखिलेश भी लगातार पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर फोकस किए हुए हैं। अब सुनिए, बैठक के बाद बसपा नेताओं ने क्या कहा- 206 से 1 विधानसभा सीट पर सिमटी बसपा 2007 में 206 विधानसभा सीटें जीतने वाली बसपा की अब हालत ये है कि विधानसभा में सिर्फ एक विधायक है। 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश के 15.2 करोड़ वोटर्स में से 12.9 फीसदी वोट बसपा को मिला। उसे कुल एक करोड़ 18 लाख 73 हजार 137 वोट मिले थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा की स्थिति नहीं सुधरी। 2019 के लोकसभा में 10 सीटें जीतने वाली बसपा इस बार खाता भी नहीं खोल पाई। उसका वोट प्रतिशत 2019 में 19.43% से गिरकर 9.35% रह गया। ये विधानसभा चुनाव से भी लगभग 3 प्रतिशत कम था।
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