महान शिक्षाविद, साहित्यकार और कुशल राजनीतिज्ञ डॉ. सम्पूर्णानंद की जयंती तथा विख्यात वैज्ञानिक डॉ. शांति स्वरूप भटनागर की पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव के चंदन नगर स्थित आवास पर हुआ, जिसमें माल्यार्पण और विचार गोष्ठी शामिल थी। गोष्ठी में महासभा के संरक्षक प्रेम कुमार श्रीवास्तव ने डॉ. सम्पूर्णानंद के बहुमुखी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. सम्पूर्णानंद एक कुशल राजनीतिज्ञ, भारतीय संस्कृति और दर्शन के प्रकांड विद्वान, जागरूक शिक्षाविद और गंभीर साहित्यकार थे। वर्ष 1921 में महात्मा गांधी के राष्ट्रीय आंदोलन से प्रेरित होकर वे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, डॉ. सम्पूर्णानंद उत्तर प्रदेश के गृहमंत्री और शिक्षामंत्री बने। वर्ष 1955 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला। बाद में, 1962 में उन्हें राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया। 1967 में राज्यपाल पद से मुक्त होने के बाद वे वाराणसी लौट आए और अपनी मृत्यु तक काशी विद्यापीठ के कुलपति रहे। जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने डॉ. सम्पूर्णानंद और डॉ. शांति स्वरूप भटनागर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर बात की। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. शांति स्वरूप भटनागर को एक महान वैज्ञानिक बताया। उन्हीं की अध्यक्षता में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) का गठन किया गया था और उन्हें इसका प्रथम महानिदेशक बनाया गया। डॉ. भटनागर के सम्मान में, उनकी मृत्यु के उपरांत देश के कुशल वैज्ञानिकों को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। उन्हें 1954 में विज्ञान एवं अभियांत्रिकी क्षेत्र में विशिष्ट कार्य के लिए पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। श्रीवास्तव ने कहा कि दोनों विभूतियां राष्ट्र का गौरव थीं। इस अवसर पर चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, मोहनलाल श्रीवास्तव, शैल श्रीवास्तव, मनीष श्रीवास्तव, अश्वनी श्रीवास्तव, हर्ष और आर्यन सहित कई सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन जिला महामंत्री अरुण सहाय ने किया।
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