लखनऊ के श्री गोशालेश्वर हनुमंत धाम में वर्ष 2025 में शुरू हुआ विशेष धार्मिक अनुष्ठान 11 महीने बाद पूरा हो गया है। इस पूरे कालखंड में बृजेश महाराज ने कठोर तप और संयम का पालन किया। साधना के दौरान उन्होंने मौन व्रत रखा और दरबार से बाहर नहीं निकले। फल, दूध और जल पर आधारित साधना धाम से जुड़े लोगों ने बताया कि, 11 महीनों की इस साधना में महाराज ने पहले पांच महीने फलाहार, इसके बाद चार महीने दुग्धाहार और अंतिम दो महीने केवल जल का सेवन किया। यह अनुष्ठान वर्ष 2025 में प्रारंभ हुआ था, जो लगातार चला। आज निकली दंडवत यात्रा मौन व्रत पूर्ण होने के बाद आज, 1 जनवरी 2026 को बृजेश महाराज हनुमंत धाम से मुख्यमंत्री आवास तक दंडवत यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरान वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा को धार्मिक संकल्प और आत्मसमर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। 3 जनवरी से 11 दिन हवन-भंडारा धाम में साधना पूर्ण होने के बाद शनिवार 3 जनवरी 2026 से 11 दिनों तक हवन और इसके साथ 11 दिनों तक भंडारे का आयोजन किया जाएगा। अनुमान है कि इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचेंगे। संपत्ति त्याग और संकल्प का दावा बृजेश महाराज का कहना है कि उन्होंने अपनी गाड़ी और धन-संपत्ति को दरबार और सनातन धर्म के कार्यों में समर्पित कर दिया है। उनका दावा है कि अब उनके पास बाबा के अलावा कुछ भी शेष नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर वे अपने शरीर के दान से भी पीछे नहीं हटेंगे। चित्रकूट तक अगली दंडवत यात्रा धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में 21 फरवरी 2026 को बृजेश महाराज अपने गुरु जगतगुरु रामभद्राचार्य से मिलने के लिए लखनऊ से चित्रकूट तक दंडवत यात्रा पर जाएंगे।
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