कुशीनगर जनपद के खड्डा रेताक्षेत्र के लोगों के लिए यह खबर किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। आज़ादी के बाद पहली बार बड़ी गंडक (नारायणी) नदी के उस पार बसे हजारों लोगों की पीड़ा, संघर्ष और जोखिम भरी ज़िंदगी को स्थायी समाधान मिलने जा रहा है। खड्डा क्षेत्र के ग्राम भैंसहा घाट पर प्रस्तावित पक्के पुल के निर्माण को लेकर साल के आखिरी दिन व्यय वित्त समिति (EFC) ने 716 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब शासन स्तर से बजट आवंटन के बाद पुल निर्माण कार्य शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस स्वीकृति की खबर मिलते ही खड्डा रेताक्षेत्र के मरिचहवा, हरिहरपुर, नारायनपुर, शिवपुर सहित महराजगंज जनपद के सोहगीबरवा, बसही, भोथहा और शिकारपुर जैसे गांवों में खुशी की लहर दौड़ गई। जिन लोगों ने पीढ़ियों तक नारायणी को अपनी मजबूरी और अभिशाप दोनों के रूप में देखा, उनके लिए यह पुल उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी बनकर सामने आया है। रेता क्षेत्र में रहने वाले 50 हजार से अधिक लोग हर साल बाढ़ के मौसम में अपने ही गांवों में कैद हो जाते थे। न सड़क, न स्थायी पुल—खड्डा तहसील मुख्यालय, अस्पताल, बाजार या विद्यालय पहुंचने के लिए या तो बिहार के रास्ते 43 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी या फिर जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करनी मजबूरी बन जाती थी। बरसात के दिनों में गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लादकर नाव से पार कराया जाता, बीमार मरीज समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ देते और छात्र महीनों तक स्कूल नहीं जा पाते। कई बार नाव पलटने की घटनाएं भी हुईं, लेकिन मजबूरी ऐसी थी कि लोग खतरे को ही अपना नसीब मान चुके थे। वर्ष 2019 में भैंसहा घाट पर पीपा पुल का निर्माण हुआ, जिससे रेतावासियों को कुछ राहत जरूर मिली और दूरी घटकर लगभग 10 किलोमीटर रह गई। लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई। जैसे ही नदी में जलस्तर बढ़ता, पीपा पुल बह जाता और संपर्क पूरी तरह टूट जाता। बाढ़ के साथ ही रेताक्षेत्र एक बार फिर दुनिया से कट जाता। रेतावासियों की इस पीड़ा को आपके दैनिक भास्कर समूह ने जोखिम उठा करते हैं नदी पार” की खबरें प्रमुखता से उठाया। इस खबर ने शासन-प्रशासन का ध्यान एक बार फिर रेताक्षेत्र की भयावह हकीकत की ओर खींचा। जब पुल बनने की बात रेता वासी सुने तो खुशी मानने लगे पटाखे फोड़े गए खबर प्रकाशित होते ही खड्डा विधायक विवेकानंद पांडेय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और पीपा पुल की जगह स्थायी पक्का पुल निर्माण की ठोस मांग रखी। विधायक ने मुख्यमंत्री को बताया कि खड्डा विधानसभा उत्तर प्रदेश का पूर्वोत्तर प्रवेश द्वार है, जो बिहार और नेपाल की सीमा से सटा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद रेताक्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। मुख्यमंत्री की घोषणा से EFC की मंजूरी तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 मार्च 2023 को खड्डा तहसील भवन के उद्घाटन के दौरान भैंसहा घाट पर पक्का पुल बनाए जाने की मंच से घोषणा की थी। इसके बाद 3 अगस्त 2024 को ग्राम तुर्कहा में आयोजित बाढ़ राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दोबारा पुल निर्माण की घोषणा करते हुए कहा था कि सांसद विजय कुमार दुबे और विधायक विवेकानंद पांडेय लंबे समय से रेतावासियों की पीड़ा को शासन के सामने उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सेतु निगम की टीम ने स्थल चयन और सर्वे किया। लखनऊ सेतु निगम यूनिट के वरिष्ठ अधिकारियों ने विधायक की मौजूदगी में नाव से नदी के दोनों तटों का गहन निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी। उसी रिपोर्ट के आधार पर साल के अंतिम दिन व्यय वित्त समिति ने 716 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी। “यह पुल सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है” विधायक विवेकानंद पांडेय ने कहा, “यह पुल केवल नदी के दो किनारों को नहीं जोड़ेगा, बल्कि रेताक्षेत्र के लोगों को सम्मान, सुरक्षा और विकास से जोड़ेगा। दशकों से जिन लोगों की आवाज़ अनसुनी थी, आज उनकी पीड़ा को शासन ने समझा है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता और रेतावासियों के संघर्ष की जीत है।” अब बदलेगी रेता क्षेत्र की तस्वीर पक्का पुल बनने से रेताक्षेत्र में बाढ़ के दिनों में भी सुरक्षित आवागमन संभव होगा। स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी, बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं होगी और व्यापार-रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। जो रेतावासी अब तक खुद को मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस करते थे, उन्हें विकास से जुड़ने का स्थायी रास्ता मिलेगा। रेताक्षेत्र के लोगों के लिए यह पुल सिर्फ कंक्रीट और लोहे की संरचना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे दर्द का अंत और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है।
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