कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। ICU में भर्ती डोनर और रिसीवर मिले। डोनर से 60 लाख रुपए में किडनी का सौदा किया गया, लेकिन महज 9.50 लाख दिए गए। इसके बाद उत्तराखंड के युवक से विवाद हुआ, तो मामला खुला। जांच में सामने आया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए लखनऊ और दिल्ली से डॉक्टरों की टीम आती थी। देश के अलग-अलग राज्यों से युवकों को जाल में फंसाकर किडनी का सौदा किया जाता था।
अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में शामिल आहूल अस्पताल की डॉ. प्रीति आहूजा उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह व एजेंट शिवम अग्रवाल को अरेस्ट किया गया है। पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि शिवम ने मूलरूप से बिहार के रहने वाले MBA 4th सेमेस्टर स्टूडेंट को 6 लाख में किडनी डोनेट करने को राजी किया था। आयुष के पुलिस को मिल म्यूल अकाउंट जिसके बाद मेरठ की निवासी पारुल तोमर को किडनी डोनेट की गई थी। पुलिस की जांच में आयुष के म्यूल अकाउंट भी पुलिस को मिले है, जांच में आयुष के साइबर क्राइम में भी शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि 3 मार्च को साउथ अफ्रीका की रहने वाली अरबिका का भी ट्रांसप्लांट आहूजा हॉस्पिटल में किया गया था। पूरा गिरोह एक व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा था। 8वीं पास शिवम स्टेथोस्कोप लटका कर घूमता था गिरोह का एजेंट शिवम अग्रवाल 8वीं पास है, वह एंबुलेंस ड्राइवर है, लोगों को झांसे में लेने के लिए वह एप्रेन और गले में स्टेथोस्कोप लटका कर घूमता था। शिवम फरार डॉ रोहित उर्फ राहुल, आहूजा हॉस्पिटल की डॉ प्रीति आहूजा और डॉ सुरजीत आहूजा के संपर्क में था। डॉ प्रीति एमडी मेडिसिन है, जबकि डॉ सुरजीत एमडी पैथोलॉजी हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 30 साल की पारुल तोमर की दोनों किडनियां खराब है, वह करीब 8 साल से डायलिसिस करा रही हैं। 6 लाख में आयुष को किया था राजी गिरोह ऐसे ही लोगों को टारेगट कर उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए फंसाता था। पूरा सिंडिकेट एक टेलीग्राम ग्रुप से संचालित होता था। पारूल से फरार डॉक्टर अफजल ने ट्रांसप्लांट कराने को कहा था, इसके बाद कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल ने मूलरूप से बिहार के रहने वाले देहरादून से MBA करने वाले आयुष को 6 लाख में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए राजी किया था। ट्रांसप्लांट होने के बाद शिवम को 7 लाख रुपए दिए थे, जिसमें से 3.50 लाख उसने आयुष के खाते में डाले, 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए और 50 हजार रुपए उसने अपने पास रखे थे। मामले में मामले में डॉक्टर रोहित उर्फ राहुल का नाम आया है, यह डॉक्टर अपनी पूरी टीम के साथ किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पूरी प्रक्रिया के दौरान फाइल तैयार नहीं की जाती थी। आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 वह बीएनएस की धारा 143 के तहत कार्रवाई की गई है।

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