निर्मला हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई के बाद अब सोना हॉस्पिटल भी स्वास्थ्य विभाग की जांच के दायरे में आ गया है। विभाग की गठित कमेटी ने आरोपों को लेकर सोना हॉस्पिटल के स्टाफ के बयान दर्ज कर लिए हैं। साथ ही अस्पताल के अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच कर लापरवाही के साक्ष्य तलाशे जा रहे हैं। मामला कनीगंज निवासी सुशील कुमार कौशल की मां की मौत से जुड़ा है। सुशील ने आरोप लगाया था कि इंजेक्शन की ओवरडोज के कारण उनकी मां की मौत हुई। इससे पहले उनकी मां का इलाज सोना हॉस्पिटल में चल रहा था। सुशील के अनुसार, 8 दिसंबर को सोना हॉस्पिटल में डॉ. हरिओम यादव ने उनकी मां को पथरी के ऑपरेशन के लिए भर्ती किया था। 9 दिसंबर को दोपहर करीब दो बजे मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। शाम साढ़े चार से पांच बजे के बीच परिजनों को बताया गया कि मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है। आरोप है कि इसके बाद डॉक्टरों ने मरीज को निर्मला हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी, जहां इंजेक्शन की ओवरडोज दी गई और बाद में महिला की मौत हो गई। प्रकरण में निर्मला हॉस्पिटल का आईसीयू और ओटी सील कर दिया गया है, जबकि उसके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सर्जरी से पहले मरीज की सभी जांच रिपोर्ट होने के बावजूद ऑपरेशन में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। ऑपरेशन के दौरान अचानक महिला की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या थी, इसकी भी जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम सोना हॉस्पिटल के स्टाफ से पूछताछ कर रही है और सीसीटीवी फुटेज व दस्तावेजों से बयानों की पुष्टि की जा रही है। शुरुआत में अभिलेख उपलब्ध न कराने पर विभाग ने सख्ती दिखाई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने रिकॉर्ड सौंपे। सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि सोना हॉस्पिटल के खिलाफ जांच जारी है और साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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