जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 2025 में ड्रोन घुसपैठ की कुल 791 घटनाएं दर्ज की गईं। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इनमें से ड्रोन घुसपैठ की नौ घटनाएं जम्मू और कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर और 782 घटनाएं पंजाब तथा राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुईं।
इसमें कहा गया, ‘‘पश्चिमी मोर्चे पर अपने ‘‘स्पूफर और जैमर’’ का प्रभावी उपयोग ड्रोन के खतरे का काफी हद तक मुकाबला करने में कारगर साबित हुआ।’’
मंत्रालय ने वर्ष के अंत में समीक्षा वक्तव्य में कहा कि इस अवधि के दौरान, भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में 237 ड्रोन मार गिराए जिनमें विस्फोटक युक्त पांच ड्रोन, मादक पदार्थ से लदे 72 ड्रोन और बिना किसी वस्तु वाले 161 ड्रोन शामिल हैं।
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मंत्रालय ने कहा कि भारतीय सेना के अथक प्रयासों के कारण जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति ‘‘पूरी तरह से नियंत्रण में’’ है। इसमें कहा गया कि लोगों ने विकास का मार्ग चुना है और वे सरकार और सेना द्वारा संचालित सभी पहलों में बड़ी संख्या में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
मंत्रालय ने कहा कि ‘पूरे देश’ के दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप ‘‘हिंसा के स्तर में कमी आई है, विरोध प्रदर्शन कम हुए हैं और पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई है’’।
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वार्षिक समीक्षा वक्तव्य में कहा गया, ‘‘पाकिस्तान ने 2023-24 के दौरान पुंछ-राजौरी क्षेत्र को ‘छद्म युद्ध के केंद्र’ के रूप में सक्रिय करने का प्रयास किया। इसलिए, 2025 के लिए निर्धारित लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया था, जिसमें मजबूत घुसपैठ-विरोधी ग्रिड को बनाए रखना, आतंकवादियों को वहां से भागने पर मजबूर करना या निष्क्रिय करने के लिए मध्य और उच्च क्षेत्रों में निरंतर अभियान चलाना और विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाकर स्थानीय स्तर पर आतंकवादियों की भर्ती को कम करना शामिल था।
इसमें कहा गया, ‘‘2019 से भीतरी इलाकों में सुरक्षा स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।’’
मंत्रालय ने कहा कि प्रशिक्षण शिविरों की कार्यशैली, लॉन्चिंग पैड पर आतंकवादियों की उपस्थिति और घुसपैठ के लगातार प्रयास पाकिस्तान के ‘छद्म युद्ध की रणनीति को आगे बढ़ाने के दृढ़ इरादे’ का सबूत देते हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। वह न केवल ड्रोन के जरिये हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए, बल्कि बड़ी संख्या में आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए भी सीमा का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘मौजूदा परिचालन संबंधी चिंताओं’’ को ध्यान में रखते हुए, ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रणालियों, हथियार प्रणालियों, सटीक गोला-बारूद, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों, निगरानी प्रणालियों आदि के विशिष्ट प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आपातकालीन खरीद के लिए मंजूरी दी गई है।
वार्षिक समीक्षा वक्तव्य के मुताबिक, ‘‘कुल 29 क्षमता विकास योजनाओं के लिए पहले ही अनुबंध किए जा चुके हैं।’’
ड्रोन के निर्माण और गोला-बारूद उत्पादन में ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि ‘‘515 आर्मी बेस कार्यशाला और चुनिंदा कोर जेड वर्कशॉप/ईएमई बटालियन ने आंतरिक विशेषज्ञता और विषय विशेषज्ञों के सहयोग से विश्वसनीय ड्रोन निर्माण क्षमता स्थापित की है’’।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘ये सुविधाएं अत्याधुनिक हैं और ड्रोन की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। ईएमई इकाइयों द्वारा अब तक कुल 819 ड्रोन (निगरानी – 193, आत्मघाती/सशस्त्र/हथियारबंद – 337, पायलट द्वारा प्रत्यक्ष दृश्य – 289) निर्मित किए जा चुके हैं।
इससे पहले पिछले साल के आंकड़ो पर एक नजर डाली जाए तो सरकार ने लोकसभा को बताया कि 2014 से भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की सबसे ज़्यादा कोशिशें पकड़ी गईं, जिसमें 2024 तक 7,528 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर 425 मामले, भारत-म्यांमार सीमा पर 298 मामले और भारत-नेपाल और भूटान सीमाओं पर 157 घटनाएं हुईं। खास बात यह है कि इस दौरान भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ का कोई मामला सामने नहीं आया।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में साल-दर-साल डेटा साझा किया, जिसमें भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर लगातार निगरानी और मॉनिटरिंग पर ज़ोर दिया गया।
विस्तृत आंकड़े पेश करते हुए राय ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की कोशिशें 2024 में सबसे ज़्यादा 977 मामलों तक पहुंच गईं, जबकि भारत-पाकिस्तान में उसी साल 41 मामले दर्ज किए गए। भारत-म्यांमार में 37 घटनाएं और भारत-नेपाल और भूटान में 2024 में 23 मामले सामने आए। उन्होंने नवंबर 2025 तक महीनेवार डेटा भी दिया, जिसमें भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1,104 मामले, भारत-पाकिस्तान पर 32, भारत-म्यांमार पर 95 और भारत-नेपाल और भूटान पर 54 मामले दिखाए गए। एक बार फिर, उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा पर घुसपैठ का कोई मामला सामने नहीं आया।
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