50 ग्राम का चूजा 21 दिनों में ढाई किलो का हो जाएगा। देखकर कोई नहीं समझ पाएगा कि दवा से तैयार किया गया है। मार्केट में ऐसी-ऐसी दवाएं है, जो चूजा को फुलाकर बड़ा कर देती हैं। पोल्ट्री फार्म खोलिए, माल कमाइए। एक साल में कमाकर मालामाल हो जाएंगे। आम लोगों के सेहत की चिंता मत कीजिए, खाने वालों को दबाकर खाने दीजिए। डिमांड बढ़ेगी तो अपना धंधा भी चलता रहेगा। यह दावा पोल्ट्री फार्म में स्टेरॉयड से मुर्गा तैयार करने वाले एजेंट्स कर रहे हैं। न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए बिहार में 30 करोड़ से अधिक के मुर्गे दवा से तैयार किए गए हैं। जो नए साल के जश्न के लिए सबसे अधिक है। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार के 6 जिलों के 12 से अधिक पोल्ट्री फार्म से 30 हजार मुर्गे की डील की है। ऑपरेशन डर्टी सेलिब्रेशन पार्ट 4 में पढ़िए दवा से तैयार हो रहे मुर्गों की कहानी..। पोल्ट्री फार्म खोलने के बहाने इन्वेस्टिगेशन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि पोल्ट्री फार्म में प्रतिबंधित दवा और स्टेरॉयड से मुर्गों का वजन बढ़ाया जा रहा है। न्यू ईयर पर सेलिब्रेशन के लिए 30 करोड़ से अधिक के मुर्गों को एक माह में तैयार कर दिया गया है। सेहत के लिए खतरनाक मुर्गों को तैयार करने वाले धंधेबाजों को एक्सपोज करने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पोल्ट्री फार्म खोलने के बहाने पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सारण में 12 से अधिक पोल्ट्री फार्म से डील की है। भास्कर के खुफिया कैमरे पर धंधेबाजों ने 21 दिन 50 ग्राम के चूजे को ढाई किलो का मुर्गा बनाने का खुलासा किया। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को पटना के गर्दनीबाग 70 फीट पर एसएस पोल्ट्री फार्म का इनपुट मिला। यहां दवा से तैयार मुर्गों की सप्लाई पटना के अलग-अलग सेंटरों पर की जाती है। भास्कर रिपोर्टर जब एसएस पोल्ट्री फार्म पहुंचा तो यहां बिट्टू से मुलाकात हुई, जिसने दवा से मुर्गे का वजन बढ़ाने का खेल बताया। रिपोर्टर – एक पोल्ट्री फार्म खोलना है, इसकी जानकारी लेने आए हैं। बिट्टू – देखिए यहां तैयार माल आता है, यहां से दुकान में बेचा जाता है। रिपोर्टर – कहा से मुर्गे आते हैं, यहां क्या होता है। बिट्टू – यहां सिर्फ दो से तीन दिन रखा जाता है, यहीं से दुकानों पर भेज दिया जाता है। रिपोर्टर – इससे आपको क्या फायदा होता है? बिट्टू – यहां मुर्गों का वजन बढ़ाया जाता है, बस यही फायदा है। रिपोर्टर – क्या खिलाते हैं? बिट्टू – इसका दाना मक्का में दवा मिलाकर बनता है। रिपोर्टर – इससे वजन बढ़ जाता है क्या? बिट्टू – इसमें दवा भी मिलाना पड़ता है, पानी में केमिकल भी मिलाते हैं। रिपोर्टर – कौन सी दवा और केमिकल मिलाते हैं? बिट्टू – वजन बढ़ने वाला सब आता है। दवा से 24 घंटे में 100 ग्राम वजन बढ़ जाएगा बातचीत के दौरान बिट्टू ने खुलासा किया कि पोल्ट्री फार्म में मुर्गे का चूजा 50 ग्राम का आता है। इनको दवा देना शुरू किया जाता है तो 24 घंटे में 100 ग्राम से ऊपर बढ़ जाता है। अगर दवाएं अच्छा से काम करें तो एक दिन में 150 ग्राम तक बढ़ सकता है। बिट्टू ने यह भी खुलासा किया कि बिना दवावाले चूजे 24 घंटे में 20 ग्राम भी नहीं बढ़ते हैं। बिट्टू के मुताबिक बाजार में कोई भी मुर्गा बिना दवा वाला नहीं बिक रहा है। रिपोर्टर – दवा से एक दिन में कितना वजन बढ़ता है? बिट्टू – एक बार दवा देने से 24 घंटे में 100 ग्राम से अधिक बढ़ जाएगा। रिपोर्टर – अगर दवा ना दिया जाए तो कितना बढ़ेगा एक दिन में? बिट्टू – यह बिना दवा के बढ़ने वाला ही नहीं, 24 घंटे में 20 ग्राम भी नहीं बढ़ेगा। रिपोर्टर – यानि हर हाल में दवा देना ही पड़ेगा? बिट्टू – बिना दवाई दिए कोई मुर्गा का काम कर ही नहीं सकता है। रिपोर्टर – यानि बिना दवा के नहीं चलेगा? बिट्टू – जब बचत ही नहीं होगा तो क्या धंधा करेगा कोई। रिपोर्टर – बाजार में सभी मुर्गे दवा वाले ही बिक रहे हैं क्या? बिट्टू – 100 प्रतिशत, एक भी मुर्गा बिना दवा वाला नहीं है। बिट्टू से बातचीत में हमें पटना के ही एजेंट असलम के बारे में पता चला। असलम दीघा में सेंटर चलाता है और पोल्ट्री फार्म वालों को दवा व केमिकल की सप्लाई करता है। रिपोर्टर दीघा के असलम से मिला तो उसने मुर्गे को केमिकल से बढ़ाने का पूरा खेल बताया। रिपोर्टर – मोतिहारी से आए है, पोल्ट्री फॉर्म खोलना है। आप दवा और केमिकल दे दीजिएगा क्या? असलम – काम तो करते हैं, दवा और वैक्सीन सब मिल जाएगा। रिपोर्टर – वैक्सीन कैसे देते हैं? असलम – सब पानी और दाना में डाल कर दिया जाता है। रिपोर्टर – हमारे जान पहचान में कुछ लोग किए है, उनका मुर्गा जल्दी नहीं बढ़ता। असलम – बिना दवा के कभी नहीं बढ़ेगा। रिपोर्टर – यही डर है, मेरे साथ भी ऐसा ही नहीं हो जाए। बहुत घाटा लग जाएगा। असलम – आप दाना में दवा मिला कर खिलाइए, एकदम पानी की तरह बढ़ेगा। रिपोर्टर – कौन सी दवा देना होगा, कितने दिन में कितना बड़ा होगा? असलम – आप फार्म शुरू कीजिए, हम सब दवा और दाना आपको दे देंगे। रिपोर्टर – दवा से बढ़ने की गारंटी है ना? असलम – मेरा दावा है, मुर्गा 21 दिन में 2 किलो से अधिक का हो जाएगा। रिपोर्टर – आप दावे के साथ बोल रहे हैं, तो भरोसा लग रहा है? असलम – आप टेंशन मत लीजिए, ऐसी दवा दे देंगे, रातों रात चूजा बढ़ जाएगा। पटना में इन्वेस्टिगेशन के दौरान गोपालगंज में बड़े पैमाने पर केमिकल और दवा से चूजा को कम समय में दो किलो से अधिक वजन का मुर्गा बनाने वालों के बारे में पता चला। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम गोपालगंज में ऐसे नेटवर्क को तलाशने में जुटी तो अनूप के बारे में पता चला। अनूप से मोबाइल पर बात हुई तो वह फार्म हाउस पर मिलने को बुलाया। रिपोर्टर – हम मोतिहारी से आए हैं, हमें मुर्गा फॉर्म खोलना है। कैसे फायदा होगा बताइए? अनूप – बहुत फायदेमंद रहेगा, आप आंख बंदकर पोल्ट्री फार्म खोलिए। रिपोर्टर – क्या खर्चा आएगा? अनूप – जैसा फॉर्म खोलिएगा, वैसा पैसा लगेगा। पूरा सेटअप करना पड़ता है। रिपोर्टर – सेटअप तो एक बार होगा, उसके बाद क्या खर्च आता है। अनूप – आपको जो खर्चा है वो चूजों को खिलाने पिलाने पर है। रिपोर्टर – बढ़िया दाना कहां मिलेगा, जिससे जल्दी बढ़ जाएं? अनूप – हमारे यहां सारा सामान मिल जाएगा, दाना, सूई, दवाई सब कुछ। रिपोर्टर – कितने दिन में तैयार हो जाता है, कितना वजन हो जाता है। अनूप – 20 दिन मेरा बनाया दाना खिलाइए, मुर्गा 2 से ढाई किलो का हो जाएगा। रिपोर्टर – अगर चूजा लाएं और नॉर्मल दाना दे तो कितने दिन में बढ़ेगा? अनूप – वो बढ़ेगा ही नहीं, बिना दवा के मुर्गा बढ़ेगा ही नहीं। एजेंट ने चूजा फुलाने का दाना-केमिकल सब दिखाया गोपालगंज में बातचीत के दौरान अनूप ने दाना और केमिकल सब दिखाया। उसने बताया भी कि वह जो केमिकल देगा, उससे कितनी तेजी से मुर्गे का वजन बढ़ेगा। अनूप ने दावा किया कि यह दवा और केमिकल ऐसा है, जिसे चूजा खाकर फूल जाता है। एकदम पानी की तरह तेजी से वजन बढ़ता है। 20 से 21 दिनों में मुर्गे का वजन दो से ढाई किलो तक पहुंच जाता है। एजेंट अनूप ने रिपोर्टर को दाना और उसमें मिलाने वाली दवा, केमिकल दिखाते हुए बताया कि यहीं से दाना और दवा ले जाइए। जैसा बताएंगे वैसे खिलाइए आप मालामाल हो जाएंगे। एजेंट ने बताया कि आप पोल्ट्री फार्म का सेटअप तैयार कीजिए, बाकी सारी व्यवस्था वह कर देगा। अनूप के मुताबिक पूरे बिहार में ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है, जो मुर्गे को कम समय में वजन बढ़ाने के लिए दवा और केमिकल की सप्लाई करता है। इसमें कई दवाएं प्रतिबंधित हैं, लेकिन वह पोल्ट्री फार्म पर लाकर देते हैं। गोपालगंज में ही भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को मोहम्मदपुर के जुनैद के बारे में पता चला। जुनैद लंबे समय से पोल्ट्री फार्म में दवा केमिकल और वजन बढ़ाने वाले इंजेक्शन की सप्लाई करता है। इनपुट मिलने के बाद टीम जब गोपालगंज के मोहम्मदपुर में पहुंची तो यहां हमारी मुलाकात जुनैद से उसके पोल्ट्री फार्म पर ही हुई। जुनैद के पास 6 पोल्ट्री फार्म है, यहां वह 20 दिनों में दो किलो तक के मुर्गे बेचता है। एजेंट ने पोल्ट्री फार्म दिखाया और यहीं से दवा और केमिकल की पूरी डील की। रिपोर्टर – आप बड़े पैमाने पर पोल्ट्री फार्म चलाते हैं, हमारी मदद करें? जुनैद – आप कहां से आए हैं, क्या मदद चाहिए? रिपोर्टर – हम भी बेतिया में बड़ा पोल्ट्री फार्म खोलना चाहते हैं? जुनैद – हम हर तरह से मदद करेंगे, यहां सब सामान मिल जाएगा। रिपोर्टर – हमको आइडिया नहीं है, कैसे क्या होगा? जुनैद – सब से पहले आप जगह की व्यवस्था कीजिए और फार्म बनाइए। रिपोर्टर – कहां से बच्चा खरीदें क्या खिलाए, कहां बेचे और कैसे फायदा कमाएं। जुनैद – सब यहां हो जाएगा, आप निश्चिंत रहिए। रिपोर्टर – पूरा समझा दीजिए ताकि कम लागत में बचत ज्यादा हो। जुनैद – मुनाफा के लिए जल्दी और कम दिन में मुर्गा तैयार करना होता है। रिपोर्टर – वह कैसे होगा, मुर्गा तो अपने समय से बढ़ेगा? जुनैद – दवाएं दीजिएगा तब बढ़ेगा, नहीं तो महीनों इंतजार करना होगा। रिपोर्टर – मुर्गा तैयार करने में कितना और क्या दवा देना पड़ता है? जुनैद – हम लोग दाना बनाते समय ही उसमें 28 तरह की दवाएं मिलाते हैं। रिपोर्टर – दाना कैसे बनता है? जुनैद – मकई और सोया को पीसकर उसमें दवा मिलाकर बनाते हैं। रिपोर्टर – कौन – कौन सी दवा मिलाते हैं? जुनैद – सब ग्रोथ प्रमोटर रहता है, डॉक्टर भी इसका फॉर्मूला नहीं बता पाएगा। रिपोर्टर – आप लोग कौन से डॉक्टर से कंसल्ट करते हैं? जुनैद – कोलकाता के डॉक्टर हैं, जब आप इसको खोलेंगे तो डॉक्टर फॉर्मूला बता देगा। गोपालगंज में जुनैद से डील के दौरान ही हमें गोपालगंज में दवा और केमिकल से मुर्गा का वजन बढ़ाने वाली दवा व केमिकल का कारोबार करने वाले रोहित के बारे में पता चला। रोहित का नंबर जुगाड़ किया गया और कॉल कर बात की गई तो उसने डीलिंग के लिए मोहम्मदपुर चौक पर बुलाया। रोहित ने बताया कि कैसे स्टेरॉयड से मुर्गे का वजन बढ़ाया जाता है। इसे दवा का नाम दिया जाता है, लेकिन यह सब प्रतिबंधित केमिकल ही होता है। रिपोर्टर – हम मुर्गा फार्म खोलना चाहते हैं, दवा में कुछ मदद कीजिए? रोहित – यहां सारी दवाई मिल जाएगी, कौन सा खोलना है? रिपोर्टर – बॉयलर, यहां कौन-कौन सी दवा मिल जाता है, ग्रोथ को लेकर टेंशन है। रोहित – यहां सब दवाएं और मास गेनर से लेकर वैक्सीन तक मिल जाएगी। रिपोर्टर – वजन बढ़ाने के लिए क्या करना होगा? रोहित – वही मास गेनर लेना होगा। रिपोर्टर – इसको कैसे खिलाते हैं? रोहित – कुछ दवा पानी में तो कुछ को दाना में मिला कर दिया जाता है। रिपोर्टर – ये दवा सब जगह मिल जाएगा? रोहित – हां, कुछ तो मिल जाएगा, लेकिन हम दाना में ही दवा मिलाते हैं, यह तेजी से वजन बढ़ाएगा। रिपोर्टर – वजन बढ़ाने के लिए और क्या क्या कर सकते हैं? रोहित – कई दवाएं हैं। भारत में प्रतिबंधित दवा से वजन बढ़ाने का खेल गोपालगंज में दाना में प्रतिबंधित दवा और केमिकल मिलाकर मुर्गे का वजन बढ़ाने का दावा करने वाले रोहित ने बताया कि वह ऐसी दवाएं देता है, जो भारत में प्रतिबंधित है। इसका बहुत बड़ा साइड इफेक्ट है, लेकिन इससे मुर्गों का वजन इतना तेज बढ़ता है कि पूछिए मत। दवा देने के साथ ही 24 घंटे में फर्क दिखने लगता है। 50 ग्राम के चूजे को फुलाकर दो से ढाई किलो बनाने में ऐसी ही दवाएं चाहिए होती है। इसलिए ऐसी प्रतिबंधित दवाएं लोग खुले में बेचने के बजाए दाने में मिला देते हैं। इससे प्रतिबंधित दवाओं के बारे में पता भी नहीं चलता है और पोल्ट्री फार्म वालों का काम भी हो जाता है। ऐसे दवा लेने जाइएगा तो पूरे देश में कोई नहीं देगा। रोहित ने रिपोर्टर को प्रतिबंधित दवाएं दिखाई। रोहित का दावा है कि ये दवा बहुत ही कारगर है। हम लोग छुपा कर बेचते हैं। रिपोर्टर – यह प्रतिबंधित दवाएं मुर्गे पर कैसे असर करती हैं? रोहित – यह दाने के साथ देते ही चूजे को फूलाने का काम करने लगती हैं। रिपोर्टर – आखिर इसमें क्या होता है, जो इतना तेजी से काम करता है। रोहित – पता नहीं, कोई तो केमिकल है, जो तुरंत मुर्गे का वजन बढ़ा देता है। रिपोर्टर – अगर प्रतिबंधित है तो ले जाने में दिक्कत होगी। रोहित – नहीं नहीं ले जाने में कोई दिक्कत नहीं है, दाना में मिलवा दिया जाएगा। रिपोर्टर – सबसे तेजी से वजन बढ़ाने वाली दवा की क्या कीमत है। रोहित – अलग-अलग कंपनी का अलग-अलग रेट है। रिपोर्टर – मोटा मोटी क्या रेट है? रोहित – 800 से 1500 तक ऐसी दवाएं आ जाती हैं। गोपालगंज में ही इन्वेस्टिगेशन के दौरान सारण की मंजू के बारे में पता चला। मंजू आस पास के कई पोल्ट्री फार्म में मुर्गों की देख रेख का काम करती है। मंजू की तलाश में सारण के कई गांव में घूमी। मंजू का नंबर मिला और हम उसके पास तक पहुंच गए। मंजू आसपास के 3 पोल्ट्री फार्म में देख रेख कर रही थी। रिपोर्टर – ये सब आपका पोल्ट्री फॉर्म है। मंजू – नहीं, हम लोग तो देखभाल करते हैं। रिपोर्टर – हमको भी फॉर्म खोलना है, इसीलिए देखने आए हैं। मंजू – ठीक है, अच्छा काम है। कीजिए, खूब फायदा होता है। रिपोर्टर – फॉर्म दिखा दीजिए, कैसे पूरा सिस्टम चलता है? मंजू – (फॉर्म में बातचीत कर घुमाते हुए बोली) मुर्गा को दवा दीजिए, तेजी से बढ़ेगा। रिपोर्टर – इनको क्या क्या दवा देना पड़ता है? मंजू – बहुत कुछ देना पड़ता है, बिना दवाई का नहीं बढ़ेगा ये सब। रिपोर्टर – अगर दवाई नहीं दिया जाए तो क्या होगा? मंजू – एक भी नहीं चल पाएगा, बढ़ेगा ही नहीं सब। रिपोर्टर – घर के दाना में और यहां के दाना में क्या अंतर है? मंजू – ये सब दाना में दवा मिला होता है, घर के दाना में दवा कहां होता है। रिपोर्टर – दवा खिलाने पर कितना वजन बढ़ेगा? मंजू – 20 दिन में 2 से ढाई किलो तक का हो जाएगा। रिपोर्टर – सब दवा याद रहता है क्या? मंजू – यहां दाना आ जाता है, मुंशी जी बता देते हैं किस दावा को कब और कितना देना है। रिपोर्टर – चूजा को कब से दवा दिया जाता है? मंजू – जिस दिन आएगा उसी दिन से दवा देना चालू कर दीजिए। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में कुछ ऐसे दवा डीलरों का भी पता चला जो प्रतिबंधित दवा से लेकर मुर्गे का वजन बढ़ाने वाली दवाओं की खुलेआम बिक्री करते हैं। छानबीन के दौरान पटना के ऐसे कई डीलर का पता चला जो इस धंधे में लगे हैं। ऐसे ही सुशील नाम के एक डीलर के पास रिपोर्टर पहुंचा और दवा को लेकर पूरी डील की। रिपोर्टर – हम मोतिहारी से आए हैं, हम एक मुर्गी फार्म खोलना चाहते हैं? सुशील – ठीक है, कुछ जानकारी है या सीखना चाहते हैं? रिपोर्टर – थोड़ा बहुत जानते है, लेकिन हमें पूरा गाइडेंस चाहिए। सुशील – बिल्कुल सही, तैयारी न हो तो ये बिजनेस नुकसान दे सकता है। रिपोर्टर – ब्रायलर फार्मिंग में क्या दिक्कत होती है? सुशील – ब्रायलर फार्मिंग में बहुत सावधानी से काम करना होता है। रिपोर्टर – यही सब जानकारी चाहिए, कौन-कौन सी दवाएं और वैक्सीन देनी होती हैं। सुशील – देखिए, हर दवा और वैक्सीन का एक शेड्यूल होता है। रिपोर्टर – कोई बीमारी लग जाए तो क्या करें? सुशील – तुरंत बीमार पक्षी को बाकी से अलग करना होता है। रिपोर्टर – अगर हमें दवा या वैक्सीन की जानकारी चाहिए तो? सुशील – हमारे पास पूरी लिस्ट है, कौन सी वैक्सीन कब देनी है। रिपोर्टर – जल्दी बड़ा करने के लिए क्या करना होगा? सुशील – दाना में दवा मिला कर खिलाना होगा, आप कीजिए सब काम यहां से हो जाएगा। रिपोर्टर – वजन बढ़ाने वाली दवा सूई सब मिल जाएगी ना? सुशील – हां, यहां सब मिल जाएगा। आप निश्चिंत होकर काम शुरू कीजिए, बहुत फायदा कमाएंगे। मुर्गे को दिया स्टेरॉयड का इंजेक्शन इन्वेस्टिगेशन के दौरान पता चला कि कुछ ऐसे भी इंजेक्शन मार्केट में हैं, जो जिसमें हाई स्टेरॉयड होता है। यह अगर एक किलो के मुर्गे को दिया जाए तो महज 7 दिन में ही मुर्गे का वजन 500 से 700 ग्राम तक बढ़ जाता है। पटना में ही कुछ ऐसे पोल्ट्री फार्म और मुर्गे का कारोबार करने वाले एजेंटों के इस प्रयोग को भास्कर टीम ने अपने खुफिया कैमरे में भी कैद किया है। पहले दुकानदार ने एक काली शीशी से दवा निकाली और सिरिंज में भर लिया। वह बाड़े में से एक एक कर मुर्गा निकालता गया और इंजेक्शन देता रहा। जब सवाल किया गया तो दुकानदार बोला ये वैक्सीन है, अगर मुर्गे को नहीं दिया जाएगा तो बीमार पड़ जाएगा। ऐसा बोलते हुए वह एक एक करके 4 से 5 छोटी मुर्गियों को जल्दी जल्दी इंजेक्शन देता रहा। रिपोर्टर ज्यादा सवाल करने लगा तो दुकानदार वहां से हट गया, बोला बाद में आइएगा अभी मुर्गे काटने का समय नहीं हुआ है। इंजेक्शन और स्टेरॉयड वाले मुर्गे की पहचान मुश्किल एक्सपर्ट बताते हैं कि प्रतिबंधित दवाएं और इंजेक्शन के साथ स्टेरॉयड वाले मुर्गे की पहचान कर पाना मुश्किल है। पोल्ट्री फार्म में जितने भी दाने दिए जा रहे हैं, सभी में केमिकल और हानिकारक दवाएं मिलाई जा रही है। दाना और पानी में ही मुर्गों को स्टेरॉयड और अन्य प्रतिबंधित दवाएं दी जा रही है। ऐसे मुर्गे व उनके मीट की पहचान कर पाना मुश्किल है। एक्सपर्ट की सलाह है कि ऐसे मुर्गे की मीट को कभी भी कम तापमान या रोस्टेड नहीं खाना चाहिए। इसका बड़ा साइड इफेक्ट हो सकता है। बॉयलर मुर्गे के मीटर को रेगुलर नहीं खाने की सलाह दी जाती है। अच्छे से स्टीम करके या तेज तापमान पर उबालकर साफ-सुथरा बनाकर ही खाएं। रोस्टेड कम पके चिकन को नहीं खाना चाहिए।
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