महोबा में बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला कर्मचारी को नोटिस जारी किया है, जिसकी मृत्यु लगभग 18 महीने पहले हो चुकी है। इस नोटिस में मृतका से ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने का जवाब मांगा गया है और नौकरी से निकालने की धमकी भी दी गई है। इस गंभीर लापरवाही ने पूरे जनपद में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला पनवाड़ी विकासखंड के नैपुरा गांव का है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर तैनात पार्वती देवी का निधन बीमारी के कारण 18 महीने पहले हो गया था। उनके पति किशनलाल का दावा है कि उन्होंने पत्नी की मृत्यु के 8 दिन के भीतर ही विभाग में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करा दिया था। इसके बावजूद, पनवाड़ी की बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) यासमीन जहां के हस्ताक्षर से एक नोटिस जारी किया गया। इस नोटिस में मृतका पार्वती पर आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद पाया गया। विभाग ने मृतका को दो दिन के भीतर हॉट-कुक्ड योजना के बिल-वाउचर और रिकॉर्ड के साथ कार्यालय में उपस्थित होने का अल्टीमेटम दिया है। ऐसा न करने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई है। इस नोटिस से परिवार सदमे में है। मृतका के बेटे महेश ने सिस्टम पर तंज कसते हुए कहा कि वह यह नोटिस लेकर स्वर्ग में अपनी मां के पास जाएंगे और पूछेंगे कि वह ड्यूटी पर क्यों नहीं जा रही हैं। ग्रामीणों और परिजनों को अब यह आशंका सता रही है कि कहीं पिछले 18 महीनों से मृतका के नाम पर कोई और मानदेय तो नहीं ले रहा था। परिजनों ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने का मन बना लिया है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभाग को डेढ़ साल तक अपनी कर्मचारी की मृत्यु की जानकारी नहीं थी। सरकारी फाइलों में डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी इतना बड़ा झोल संभव है? आखिर जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना रिकॉर्ड देखे एक मृतका के नाम नोटिस कैसे जारी कर दिया? अब देखना यह होगा कि किसी की मौत पर इस भद्दे भमजाक के बाद विभाग के इन लापरवाह जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

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