DniNews.Live

सिलेक्शन के बाद रोने वाले PCS अफसर का इंटरव्यू:नायब तहसीलदार आनंद बोले- भाई की मौत से टूट गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

यूपी पीसीएस 2024 क्लियर कर सोनभद्र के आनंद राज नायब तहसीलदार बन गए हैं। आनंद की सफलता सिर्फ एक रिजल्ट नहीं, बल्कि संघर्षों की कहानी है। आर्थिक तंगी, बड़े भाई की मौत और कई असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आखिर कैसे तय किया यह सफर, किसने दिया साथ और क्या रही उनकी रणनीति? प्रयागराज में रहकर तैयारी करने वाले आनंद ने दैनिक भास्कर से पूरी कहानी साझा की…साथ ही युवाओं को टिप्स भी दिए। पढ़िए रिपोर्ट… पहले आनंद और उनके परिवार के बारे में जानिए… आनंद राज (25) सोनभद्र जिले के केवली गांव के रहने वाले हैं। आनंद ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग UPPCS 2024 में 22वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार पद प्राप्त किया है। यह उनका दूसरा प्रयास था। उनकी पढ़ाई घोरावल (सोनभद्र) के संत कीनाराम विद्यालय से हुई। फिर प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। पिता किसान हैं, साथ ही एक छोटी कंपनी में कर्मचारी के रूप में काम करते हैं। मां गृहिणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। बड़े भाई अनुराग सिंह का तीन साल पहले सड़क हादसे में निधन हो चुका है। अब पढ़िए बातचीत… सवाल : नयाब तहसीलदार बन गए हैं, कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब : बहुत ज्यादा खुशी महसूस कर रहा हूं। उसके साथ एक विनम्रता का भाव भी आ रहा है। कर्तव्य भावना से जो कर्तव्य किया… सफलता भी प्राप्त हुई। सवाल : UP PCS के बारे में ख्याल कैसे आया?
जवाब: लंबी जर्नी थी। 2009 में मैं कक्षा 5 में था। तब मुझे मेरे यहां के DM ने एक प्रतियोगिता में सम्मानित किया था। तभी मुझे सिविल सेवा का आइडिया आया। 12वीं में मेरे 90 प्रतिशत अंक थे। मेरे सामने फाइनेंसियल क्राइसिस थी। मैं अच्छे कॉलेज में नहीं पढ़ पाया। चार साल पहले मैंने हिंदी मीडियम में कोचिंग की। नोट्स बनाए। एक-एक टॉपिक के तीन-तीन, चार-चार नोट्स बनाए। 2023 वाले में प्री पास आउट हुआ था। मेंस पास नहीं कर पाया। 2024 का आईएएस का मेंस पास नहीं कर पाया। 15 नंबर से उस बार कट ऑफ रुका था। सवाल : आपके पिताजी नौकरी करते हैं, उनका क्या योगदान रहा?
जवाब : पिताजी किसान हैं। बहुत कम खेत है। घर का खर्च नहीं चल पाता है। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए और मेरी शिक्षा के लिए पिताजी ट्रैक्टर एजेंसी में मैनेजर के पद पर काम करते हैं। आप समझ सकते हैं कि घर पर क्या चुनौतियां आ रहीं होगी? सवाल : घर की स्थिति के बीच खुद को कैसे संभाला और तैयारी की?
जवाब : अपने हर प्रयास में बेहतर करता रहा। जब प्रीलिम्स निकाल लिया तो परिवार वालों ने हौसला बढ़ाया। बस यही मेरे लिए ताकत बना। जब मेंस लिखने गया तो अच्छे नंबर आए। करीब 697 नंबर थे। फिर 2024 का मैंने अटेम्प्ट दिया। मैंने उस अटेम्प्ट में अपना ऑप्शनल बदलकर पॉलिटिकल साइंस कर लिया। मेरे 248 नंबर आए थे। मुझे अंदर से हमेशा से विश्वास था कि मैं इसको निकाल रहा हूं और निकाल लूंगा। सवाल: मां-बाप के अलावा किसका सपोर्ट रहा?
जवाब: मुझे मेरे परिवार और खासकर मेरे पिता से सहयोग मिला। जिन्होंने अपनी हर कमाई मेरी पढ़ाई में लगा दी। मेरे बड़े पिताजी का भी सहयोग रहा। मेरे गुरु विनीत अनुराग सर ने बड़े भाई की तरह मुझे गाइड किया। 2022 में मेरे बड़े भाई का एक्सीडेंट में निधन हो गया। उस स्थिति में भी मेरे माता-पिता ने मुझे पढ़ाई से नहीं रोका। यह मेरी नहीं, उनकी जीत है। कई सीनियर्स और दोस्तों ने हर मुश्किल में साथ दिया। कभी खाना पहुंचाया, कभी एग्जाम छोड़ने गए। इस शहर में मुझे कभी परिवार की कमी नहीं खली। मैंने एक भाई खोया, लेकिन यहां कई भाई मिल गए। सवाल : भाई का साथ छूटने वाला पल तो कठिन रहा होगा?
जवाब : भाई केवल 23 साल का था। प्राइवेट नौकरी लगे बस एक महीने हुए थे। मैं तब ग्रेजुएशन के सेकंड ईयर में था। तभी हादसे में उसकी मौत हुई। अचानक लगा कि यह क्या हुआ? मतलब मुझे अपना भविष्य एकदम धुंधला दिख रहा था। मैं डेढ़ साल के लिए घर चला गया। उस बीच कोविड काल आया। पढ़ाई का रिदम खत्म हो गया। लेकिन उस डेढ़ साल के दौरान मैंने लगातार साहित्य पढ़ा। ‘राम की शक्ति पूजा’ पढ़ी, निराला की ‘राम की शक्ति पूजा’, प्रेमचंद पढ़ा, अलग-अलग लेखकों को, अज्ञेय को पढ़ा। साहित्य की दुनिया में मेरी रुचि जगी और मुझे कहीं न कहीं एक मोटिवेशन भी मिलता रहा। सवाल : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को क्या संदेश देंगे?
जवाब : तैयारी करने वालों के लिए सबसे जरूरी है कि वे किसी भी परीक्षा की मूल मांग और सिलेबस को अच्छे से समझें। सिलेबस और पीवाईक्यू (पिछले सत्र के प्रश्नपत्र) ही एग्जाम को समझने और उसे सही तरीके से नेविगेट करने में मदद करते हैं। मेरे अनुभव में, पढ़ाई से ज्यादा समय एग्जाम को समझने में लगा। जब एक बार सिलेबस समझ आ जाए, तो बेसिक किताबों को लगातार पढ़ना, रिवाइज करना और बार-बार दोहराना जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि बिना सवाल लगाए पढ़ाई का कोई मतलब नहीं है। जितना ज्यादा प्रैक्टिस करेंगे, उतना ही बेहतर निखरेंगे। रहीम दास जी का दोहा है कि ‘करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’। तो आप जब जितना अभ्यास करते हैं, आप उतना अधिक निखरते जाते हैं। ‘खुसरो दरिया प्रेम का उलटी वाकी धार, जो उतरा सो डूब गया जो डूबा सो पार।’ तो पहले डूबिए फिर आप पार हो जाएंगे। 932 अभ्यर्थियों में से 319 लड़कियां
932 अभ्यर्थियों का सेलेक्शन हुआ है। इनमें 319 लड़कियां हैं। चयनित अभ्यर्थियों में 37 डिप्टी कलेक्टर (SDM), 17 पुलिस उपाधीक्षक (DSP) और 196 असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स) बने हैं। पीसीएस-2023 की बात करें तो सहारनपुर के सिद्धार्थ गुप्ता ने टॉप किया था। टॉप- 10 में सिर्फ 2 लड़कियां थीं। अब अन्य अभ्यर्थियों को भी जानिए… मथुरा के मनीष कुमार नायब तहसीलदार बने
मथुरा जिले के मनीष कुमार का चयन पीसीएस परीक्षा में नायब तहसीलदार पद पर हुआ है। इनकी इस पोस्ट में 159वीं रैंक है। मनीष को यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली है। वह फरह क्षेत्र के जमालपुर गांव निवासी हैं। उनके पिता किसान हैं, जबकि बड़े भाई कल्याण सिंह वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। मेरठ की ज्योति बनीं एसडीएम
मेरठ के मवाना क्षेत्र के गांव इकवारा की ज्योति धामा ने 19वीं रैंक हासिल की है। वह एसडीएम बनी हैं। ज्योति वर्तमान में UPPCS 2025 का मेंस भी लिख रही हैं, साथ ही बीपीएससी 2024 का इंटरव्यू दे चुकी हैं और आरओ / एआरओ का मेंस भी दे चुकी हैं। ज्योति धामा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता जयवीर सिंह और माता पिता के साथ वन रेंजर खुशबू उपाध्याय (हस्तिनापुर) और सीओ साइबर क्राइम अभिषेक पटेल को दिया, जिन्होंने इंटरव्यू से पहले उनका मार्गदर्शन किया। मेरठ की पूजा चौधरी बनीं असिस्टेंट कमिश्नर अयोध्या के आनंद स्वरूप तहसीलदार बने अयोध्या के आनंद स्वरूप यादव तहसीलदार बने हैं। इनकी इस पोस्ट में 108वीं रैंक है। पिता साहब लाल यादव मिल्कीपुर से पूर्व जिला पंचायत सदस्य थे। तीन भाइयों में आनंद स्वरूप सबसे बड़े हैं। उनकी पत्नी मुक्ता यादव बीकापुर में टीचर हैं। उनके छोटे भाई बृजेंद्र स्वरूप यादव सुल्तानपुर जिला न्यायालय में जज हैं। UPPSC में कानपुर की श्वेता वर्मा की 21वीं रैंक कानपुर नगर के शिवराजपुर कस्बे की श्वेता वर्मा ने यूपीपीसीएस परीक्षा में 21वीं रैंक हासिल की है। श्वेता ने रामसहाय इंटर कॉलेज, बैरी शिवराजपुर से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की। प्रयागराज से बीटेक किया। वर्तमान में श्वेता और उनके पति सुधांशु कुमार, दोनों दूरदर्शन दिल्ली में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। श्वेता के पिता जगदीश वर्मा सरकारी बैंक में कैशियर के पद से रिटायर हुए। जबकि मां हाउस वाइफ हैं। श्वेता तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी हैं। उनके छोटे भाई शैलेंद्र वर्मा शिवराजपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 7 से सभासद हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें… पंक्चर बनाने वाले की बेटी बनी नायब तहसीलदार:यूपी PCS पास किया तो मंदिर में फूट-फूटकर रोया, ननद डिप्टी एसपी, भाभी CTO बनीं यूपी पीसीएस 2024 में दिल्ली की नेहा पंचाल ने टॉप किया है। रायबरेली की अनन्या त्रिवेदी दूसरे और अभय प्रताप सिंह तीसरे नंबर पर हैं। टॉप 10 में 6 लड़कियां हैं। इसका फाइनल रिजल्ट रविवार रात साढ़े 12 बजे जारी हुआ। बुलंदशहर की गायत्री वर्मा नायब तहसीलदार बनी हैं। इस कैटेगरी में उनकी 210वीं रैंक आई है। गायत्री के पिता राजकुमार पंक्चर की दुकान चलाते हैं। उसी में उनकी चाय की दुकान भी है। पढ़ें पूरी खबर

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *