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बहरीन में फंसी BJP नेता की मॉडल बेटी वापस लौटी:ईरान युद्ध के बीच 15 दिन पार्किंग में बिताए; यूपी लौटने में 12 लाख लगे
शूटिंग से सिर्फ 1Km दूर मिसाइल हमला हुआ। इलाके में दहशत फैल गई। मैं किसी तरह कार से अपने घर पहुंची। तभी घर के बाहर एक ड्रोन नजर आया। खतरा और बढ़ गया। हम परिवार के साथ 36 घंटे तक कार में रहे। हमारे पास खाना और पानी थोड़ा ही था। इसके बाद हमें एक सेफ बेसमेंट में ले जाया गया। वहां अन्य भारतीयों के साथ 15 दिन बिताए। ये कहना है शाहजहांपुर के भाजपा नेता की बेटी प्रियंका पाठक का, जो ईरान-इजराइल तनाव के बीच बहरीन में फंसी रहीं। मंगलवार को अपने पति और दोनों बच्चों के साथ घर पहुंचीं। भाजपा नेता की बेटी बहरीन में मॉडल हैं, जबकि दामाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। दामाद अनुज मिश्रा ने बताया- आम दिनों में भारत आने का एक टिकट 25 हजार रुपए का होता है। तनाव के समय इस एक टिकट के लिए साढ़े 3 लाख रुपए चुकाने पड़े। पूरे परिवार को सुरक्षित भारत लाने में करीब 12 लाख रुपए खर्च हुए हैं। पढ़िए रिपोर्ट… अब पढ़िए पूरा मामला… भाजपा नेता संजय पाठक तिलहर चीनी मिल में हेड कैशियर थे, जो वर्ष 2021 में रिटायर हुए। उनकी बेटी प्रियंका पाठक बहरीन में अपने पति अनुज मिश्रा के साथ रहती हैं। अनुज मिश्रा एसटीसी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि प्रियंका मॉडलिंग करती हैं। प्रियंका और अनुज के 2 बच्चे हैं। बेटी आव्या (4) नर्सरी में पढ़ती है, जबकि बेटा आहान (9) चौथी कक्षा का छात्र है। दोनों साल 2011 से बहरीन में ही रह रहे थे। इजराइल-ईरान युद्ध के दौरान प्रियंका अपने पूरे परिवार के साथ बहरीन में फंसी थीं। परिवार की सुरक्षित वापसी के लिए संजय पाठक ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात कर मदद मांगी थी। मॉडल की आपबीती पढ़िए… प्रियंका ने बताया- युद्ध शुरू होते ही हालात बेकाबू हो गए। मैं फरवरी में मॉडलिंग शूट के लिए बाहर ग थीं। तभी लोकेशन के पास मिसाइल धमाका हुआ। मैंने तुरंत पति अनुज को फोन कर हमले की जानकारी दी। कहा- जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें। बच्चों और पति की चिंता में मैं खुद कार लेकर घर के लिए निकल पड़ी। रास्ते में कई जगह धमाके होते देखे। लोग चीख-चिल्ला रहे थे। एयरपोर्ट बंद होने के कारण पूरा परिवार बहरीन में ही फंस गया। मैं एक दिन घर पर चाय बना रही थी, तभी खिड़की के सामने एक ड्रोन दिखा। खतरा भांपते तुरंत घर से बाहर निकली और शोर मचाकर परिवार को भी सुरक्षित बाहर बुला लिया। इसके बाद हमें अन्य लोगों के साथ एक बेसमेंट में शिफ्ट किया गया। यह जगह आर्मी एरिया के पास थी, जिससे हर समय हमले का खतरा बना रहता था। वहां कई अन्य भारतीय परिवार भी फंसे हुए थे। उनसे मिलने पर हमें थोड़ी राहत महसूस हुई। हमले रुकने पर घर जाकर खाना बनाते, फिर बेसमेंट लौटते
प्रियंका ने बताया कि रमजान के महीने में सुबह और शाम कुछ समय के लिए हमले रुक जाते थे। इसी दौरान हम घर जाकर जल्दी-जल्दी खाना बनाते और तुरंत बेसमेंट में लौट आते थे। इस दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करते थे। डर था कि धमाकों के बीच लिफ्ट में फंस सकते हैं या बिजली जा सकती है। जब हालात थोड़ा सामान्य हुए और सड़क मार्ग सुरक्षित लगा, तो हमें सऊदी अरब ले जाया गया। वहां से सोमवार को हम मुंबई पहुंचे। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 9 बजे तिलहर स्थित अपने घर सकुशल पहुंचे। हमारी किस्मत अच्छी रही कि सऊदी से निकल आए। हमारे निकलने के तुरंत बाद वहां के एयरपोर्ट पर फिर से हमला हो गया। अब सभी उड़ानें बंद हो चुकी हैं और कई भारतीय अभी भी वहां फंसे हुए हैं। दूतावास के पास कई धमाके हुए
प्रियंका के पति अनुज मिश्रा ने बताया कि गल्फ एयरवेज और इंडियन एयरवेज ने वहां फंसे लोगों को निकालने में मदद की। उनका ऑफिस भारतीय दूतावास के पास है, जहां नजदीकी एक बिल्डिंग में कई धमाके हुए थे। अनुज ने भारत सरकार से अपील की है कि खाड़ी देशों में अब भी फंसे अन्य भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जाए। पढ़िए जंग के 19 दिनों में अब तक क्या हुआ… अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले 19 दिनों से युद्ध चल रहा है। जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। अब उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इजराइली सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने मंगलवार को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को भी ढूंढकर खत्म कर दिया जाएगा। इजराइल में 100 से अधिक जगहों पर दागी गईं मिसाइलें
इससे पहले इजराइल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया था। इस हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी और उनके बेटे की मौत हो गई। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी इस खबर की पुष्टि भी की है। बदले की कार्रवाई में ईरान ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव समेत 100 से ज्यादा जगहों पर मिसाइलें दागी। ईरान का कहना है कि यह हमला लारिजानी, उनके बेटे और कमांडर घोलामरेजा सुलेमानी की मौत का बदला है। इस बीच अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए ईरानी मिसाइल ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। अमेरिकी सेना ने करीब 2700 किलो वजनी खतरनाक बम गिराए हैं। ये बम जमीन के गहरे अंदर बने सैन्य ठिकानों को भी पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखते हैं।
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