केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में सत्र 2025-26 के तहत छात्रावास दिवस का आयोजन किया गया। 30 और 31 मार्च को हुए इस दो दिवसीय कार्यक्रम का पहला दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भरा रहा, जहाँ छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक और लौकिक मंगलाचरण के साथ हुआ। धृति त्रिवेदी, सुमेधा आर्या और अन्य छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से आध्यात्मिक माहौल बनाया। इसके बाद हरिओम, अभिषेक, योगेश, शालिनी शुक्ला और विदुषी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में विविधता देखने को मिली स्वागत गीत और कुलगीत की प्रस्तुति के बाद, प्रो. धनिन्द्र कुमार झा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। परिसर निदेशक प्रो. सर्वनारायण झा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्रों को अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को अपनाकर समाज के उत्थान में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में विविधता देखने को मिली। प्रतीक्षा सरकार का बंगाली एकल नृत्य और अंजलि बहरा व उनकी टीम का उड़िया सामूहिक नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कथक, शिव स्तुति और दशावतार गीत जैसी प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत किया। लोकनृत्य प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा लोकनृत्यों की श्रृंखला में हिमाचली, कुमाऊँनी और बिहारी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके अतिरिक्त, कविता पाठ, संस्कृत गीत और शास्त्रार्थ जैसी बौद्धिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम में चार चांद लगाए।कार्यक्रम का समापन डॉ. कविता विसारिया के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। श्रेया पाण्डेय और निहारिका दूबे ने कार्यक्रम का संचालन किया। यह आयोजन छात्रों की प्रतिभा, सांस्कृतिक विविधता और समर्पण का एक शानदार प्रदर्शन था।

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