झांसी की सोनिया यादव ने UPPSC में फ़सलता हासिल कर साबित कर दिया कि अगर परिवार साथ खड़ा हो, तो मुश्किल हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते। रविवार आधी रात को आयोग का रिजल्ट आया और सफल अभ्यर्थियों की सूची में सोनिया का नाम चमक उठा। उनकी इस सफलता से पूरा परिवार खुशी में डूब गया। मध्य प्रदेश के चिरूला गांव से ताल्लुक रखने वाले राकेश कुमार यादव किसान हैं और उनकी पत्नी विनीता यादव खेती में उनका हाथ बंटाती हैं। बेहतर शिक्षा के लिए परिवार करीब 20 साल पहले झांसी के बड़ागांव इलाके में आकर बस गया। पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर की सोनिया बचपन से ही कुछ बड़ा करने का सपना देखती थीं किरण बेदी से मिली प्रेरणा
राजकीय इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सोनिया ने देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी के बारे में पढ़ा। यहीं से उनके मन में आईपीएस बनने का सपना जागा। हालांकि, आर्थिक तंगी बार-बार उनके रास्ते में बाधा बनती रही।
साल 2017 में उन्होंने पहली बार यूपीपीएससी परीक्षा दी, लेकिन महज 8 अंकों से चूक गईं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। छोटे भाई ने संभाली जिम्मेदारी
कोरोना काल में परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई। बड़े भाई की नौकरी चली गई, जिससे हालात और कठिन हो गए। ऐसे समय में सबसे छोटे भाई शैलेश यादव आगे आए। उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी शुरू की और अपनी बहन की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया। 2022 में उन्होंने सोनिया को दिल्ली बुलाया, जहां रहकर उन्होंने पूरी लगन से तैयारी की। मेहनत रंग लाई
सोनिया यादव का चयन अब असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर हुआ है। फिलहाल वह प्रयागराज में हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने छोटे भाई और पूरे परिवार को देती हैं, जिनके त्याग और समर्थन के बिना यह संभव नहीं था। अब लक्ष्य,आईपीएस
सोनिया का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है। उनका लक्ष्य अब भी आईपीएस अधिकारी बनना है। वह कहती हैं कि अब नौकरी मिलने से आर्थिक परेशानियां दूर हो गई हैं, जिससे वह और बेहतर तरीके से तैयारी कर पाएंगी।

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