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सहारनपुर में तीन भाइयों को हत्या में उम्रकैद:7 साल पहले जादू-टोने के शक में की थी महिला की हत्या

सहारनपुर कोर्ट ने जादू-टोने के शक में महिला की हत्या के मामले में तीन सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा दी है। कोर्ट ने दोषियों पर 3.25 लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-1 की कोर्ट में हुई। यह मामला थाना तीतरों क्षेत्र के कस्बा तीतरों का है। कोर्ट ने पत्रावली पर आए साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर सजा सुनाई है। थाना तीतरों के मोहल्ला शेखजादगान निवासी शोएब ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 25 नवंबर 2018 की शाम उसकी मां शाहीन और बड़ी बहन नाजमा बाजार से घर लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में मोहल्ला अफगानान कला के रहने वाले इमरान, आसिफ, आमिर और नवाजिश ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि आसिफ ने शाहीन के सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बहन नाजमा के शोर मचाने पर शोएब भी घटनास्थल पर पहुंचा, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। जाते-जाते उन्होंने परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। परिवार ने आरोप लगाया था कि घटना से करीब 10-12 दिन पहले आरोपियों के छोटे भाई सुफियान की बीमारी से मौत हो गई थी। आरोपियों को शक था कि सुफियान की मौत जादू-टोने के कारण हुई है और इसके लिए वे शाहीन को जिम्मेदार मान रहे थे। इसी शक में उन्होंने साजिश रचकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान आसिफ के कब्जे से देशी पिस्टल और तीन कारतूस बरामद किए गए। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान एक आरोपी इरफान की मृत्यु हो गई, जबकि बाकी तीन आरोपियों आसिफ, आमिर और नवाजिश को दोषी पाया गया। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए कुल 21 गवाह पेश किए। मृतका की बेटी नाजमा ने अदालत में आरोपियों की पहचान की और घटना का प्रत्यक्ष विवरण दिया। इसके अलावा गवाह सुजाहत खान ने भी अपने बयान में बताया कि घटना वाले दिन शाम को गोली चलने की आवाज सुनकर वह बाहर आए थे और उन्होंने एक व्यक्ति को भागते हुए देखा, जो तमंचा मौके पर ही छोड़ गया था। सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए सहारनपुर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले को अंधविश्वास के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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