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राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की बैठक में मजदूर नेता भड़के:पिता-पुत्र की मौत की जांच, सफाईकर्मी बोले- शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती

कानपुर के सर्किट हाउस में सोमवार को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान मजदूर नेताओं ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिकायतें दर्ज होने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। केवल फाइलें दौड़ती रहती हैं। आयोग के उपाध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन देकर शांत कराया। यह बैठक रावतपुर में सेफ्टी टैंक में पिता-पुत्र की मौत के मामले को लेकर बुलाई गई थी। हरदीप सिंह गिल ने शुक्लागंज स्थित मृतकों के आवास पर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। यह 2 तस्वीर देखिए… सेप्टिक टैंक में पिता-पुत्र की मौत
दरअसल, पांच दिन पहले बुधवार को कल्याणपुर इलाके में एक सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय जहरीली गैस से दो लोगों की मौत हो गई थी। ये घटना गोवा गार्डन स्थित एक आवासीय अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में हुई थी। जहां परिवार के तीन सदस्य पिता जावेद (45), उसका बेटा आकिब (25) और दामाद इरफान सफाई के लिए आधी रात के करीब सेप्टिक टैंक में उतरे थे। इसमें पिता पुत्र की मौत गई थी। इसी मामले को लेकर आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने डीएम सहित अन्य अधिकारियों से मृतकों के परिवार के लिए लिखित मुआवजे की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान दिलाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि इस घटना में ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है। 2013 के प्रावधानों के विपरीत काम लिया गया था। इस पर कार्रवाई की जा रही है। बैठक शुरू होने से पहले, मृतकों की आत्मा की शांति के लिए 30 सेकंड का मौन रखा गया। इसके बाद बैठक शुरू हुई। परिवार में पत्नी सूफिया और बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला से मुलाक़ात की, इस दौरान उनके परिजनों ने पक्का मकान दिलाने और बेटे अब्दुल्ला की पढ़ाई की जिम्मेदारी की मांग की थी। जिसपर हरदीप सिंह ने अधिक मुआवजा और पीएम योजना के तहत आवास दिलवाने का आश्वासन दिया है। यह जरूरी निर्देश दिए-
अध्यक्ष बोले- काम के बदले रिश्वत मांगी जाती है
ऑल संगठित इंडिया कर्मचारी मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संतोष राज ने बताया कि शहर में सफाई कर्चकारियों की अनेकों समस्याएं हैं। जानता दरबार में समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिया जाता है। उसमे मृतक आश्रित की फाइल अटकी हुई है। बाबू काम करने के एवज़ में रुपए मांगते हैं। उनके 18 संविदा कर्मचारी बिना कारण हटा दिए गए। सिर्फ़ वह दफ्तरों के चक्कर काट रहें हैं। आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि बिना शासन आदेश पर कर्मचारियों को जबरन मास्टर रूल दे दिया जाता है। महिलाओं को सुबह 5 बजे बुलाया जाता है। घटना होने पर जिम्मेदारी नहीं ली जाती है। उन्होंने आरोप लगाया है। रोजाना 400 वेरन मिलने की जानकारी हुई है, लेकिन कर्मचारियों को सिर्फ 9 हजार रुपए मिलते हैं। इनके पास कोई बीमा सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। आंदोलन करने पर अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं आते। मृतक आश्रित लोगों की नियुक्त नहीं की जा रही है। महिला कर्मचारियों पर आरोप लगने पर हटा दिया जाता है, उन्हें आरोपपत्र भी नहीं दिया है। जिलाध्यक्ष बोले-महिला सफाईकर्मियों की ड्यूटी का समय बदले
महादलित परिसंघ जिलाध्यक्ष के निखिल भारती ने बताया- महिला सफाईकर्मचारी की सुबह 5 बजे की हाजरी है। उनकी हाजरी सुबह 7-8 बजे की जाए। जिला और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले मजदूरों को बिना मानक और बिना सेफ्टी उपकरण नहीं दिए जाते हैं। इसकी वजह से सफाई कर्मचारियों की आए दिन मौत हो रही है। इस पर रोकथाम लगाने का सरकार इंतजाम करे। उन्होंने बताया कि शिकायत के दौरान मौके पर मौजूद बिठूर नगर पंचायत के अधिकारी कल पत्र मांगा है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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