बलिया के रामगढ़ (गंगापुर) में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ इन दिनों अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है। महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 21 बटुकों का सामूहिक उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार संपन्न हुआ। महायज्ञ के दौरान 21 बटुकों ने जनेऊ धारण कर आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश किया। आचार्य शौनक द्विवेदी और आचार्य अमन के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इन बटुकों को दीक्षित किया गया। उपनयन के पश्चात सभी बटुकों ने आजीवन वेद सेवा और राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया। यज्ञ के विशेष आकर्षण के रूप में भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया गया। गंगा तट पर हजारों दीपों की रोशनी और वेद मंत्रों के उच्चारण से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस महाआरती का नेतृत्व आचार्य मोहित पाठक ने किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, “बलिया की यह पावन भूमि महर्षि भृगु की विरासत है। हमारा साझा संकल्प होना चाहिए कि हम इस क्षेत्र को ‘द्वितीय काशी’ के रूप में परिवर्तित और विकसित करें, ताकि यहां की आध्यात्मिक चेतना पूरे विश्व को आलोकित कर सके।” कार्यक्रम में आचार्य उत्कर्ष ने श्री राम कथा का वाचन किया। यह महायज्ञ महर्षि भृगु की तपोभूमि बलिया में आयोजित किया जा रहा है।

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