प्रतापगढ़ में अनुसूचित जाति के व्यक्ति से मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससीएसटी हेमंत कुमार की कोर्ट ने छह आरोपियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने सभी दोषियों को तीन-तीन साल के कारावास और प्रत्येक पर 3100 रुपये का अर्थदंड लगाया है। दोषियों में हथिगवां के दशरथपुर टिकुरी गांव के लक्ष्मीकांत मिश्रा, लवलेश कुमार, बजरंग सेवक, राम प्रताप, संतोष कुमार और राजेंद्र कुमार शामिल हैं। वादी जियालाल के अनुसार, वह अनुसूचित जाति का व्यक्ति है और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। आरोपियों ने उसकी जमीन पर अवैध रूप से बांस के पेड़ लगाए थे। जब जियालाल ने उन्हें रोका, तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपियों ने दी जान से मारने की धमकी 25 जुलाई 2001 की शाम लक्ष्मीकांत, लवलेश कुमार, कृष्ण सेवक (जिनकी अब मृत्यु हो चुकी है), बजरंग सेवक, राम प्रताप, संतोष कुमार और राजेंद्र कुमार ने मिलकर जियालाल को लाठियों से पीटा और घायल कर दिया। आरोपियों ने उसे असलहे की मुठिया से भी मारा और जान से मारने की धमकी दी। घटना के समय हथिगवां पुलिस ने पीड़ित को थाने से भगा दिया था। इसके बाद, 27 जुलाई 2001 को पुलिस अधीक्षक के आदेश पर पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी कृष्ण सेवक की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेश बहादुर सिंह ने पैरवी की।

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