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अंबेडकर जयंती पर लखनऊ में ताकत दिखाएगी बसपा:मायावती के भी शामिल होने के लगाए जा रहे कयास, कल प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई

भाजपा-सपा के बाद अब बसपा भी अपनी सियासी ताकत दिखाने जा रही है। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती इस बार पार्टी लखनऊ में एक साथ मनाएगी। प्रदेश में छोटे–बड़े कार्यक्रमों की बजाय एक केंद्रीयकृत कार्यक्रम रखा गया है। इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं को बुलाया जा रहा है। मायावती इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर मंगलवार को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। कयास लग रहे हैं कि इस रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती खुद शामिल हो सकती हैं, हालांकि पार्टी या मायावती कैंप की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। तैयारियों को लेकर मायावती की अहम बैठक मायावती ने मंगलवार (31 मार्च) को प्रदेश के सभी प्रमुख पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में 14 अप्रैल के कार्यक्रम की तैयारियों, संगठनात्मक मजबूती और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्यक्रम सिर्फ जयंती मनाने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसे 2027 के चुनावी बिगुल के रूप में भी देखा जा रहा है। सपा पर मायावती का तीखा हमला मायावती ने जेवर एयरपोर्ट की देरी को लेकर सपा को निशाने पर लिया था। उन्होंने कहा कि जेवर में एयरपोर्ट बनाए जाने के लिए बसपा सरकार ने गंभीर प्रयास किए थे। यदि केंद्र की कांग्रेस सरकार ने मंजूरी देने में रोड़ा न अटकाया होता तो यमुना एक्सप्रेसवे की तरह जेवर एयरपोर्ट भी तैयार हो जाता। सपा सरकार में पश्चिमी यूपी के विकास को पूरी तरह से अवरूद्ध कर दिया गया था। अब सिर्फ सियासी फायदे के लिए वे पश्चिमी यूपी में सभा करने पहुंचे थे। वरिष्ठ पत्रकार सैय्यद कासिम कहते हैं कि मायावती सपा पर सीधा हमला बोल रही है। इसका मतलब है कि वे अपने कोर वोट बैंक को सहेजना चाहती है। साथ ही उस तक संदेश भी पहुंचाना चाहती है कि सपा की सरकार उनके हित में नहीं होगी। उनका भला बसपा की सरकार बनने पर ही संभव है। पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग पुरानी पश्चिमी यूपी (22 जिलों) की लगभग 8-10 करोड़ आबादी को अभी भी हाईकोर्ट के मामलों के लिए प्रयागराज जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें 500–700 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस मुद्दे पर पश्चिमी यूपी के वकील और लोग कई बार आंदोलन कर चुके हैं। मायावती सरकार में इसका प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा गया था। ये अब तक लंबित है। मायावती ने इस मुद्दे को फिर से उठाकर पश्चिमी यूपी के लोगों से जुड़े इस भावनात्मक मुद्दे छूकर अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश की है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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