जनपद के कुठौन्द थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत हुसेपुरा सुरई में मनरेगा योजना के तहत हुए कार्यों में वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के गबन का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी जालौन के कार्यालय आदेश संख्या 3045/अभि0-मनरेगा/2025-26 दिनांक 21 फरवरी 2026 के तहत हुई जांच में करीब 9.02 लाख रुपये के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है। मनरेगा लोकपाल द्वारा की गई जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत में कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। इसमें जॉब कार्डों में हेराफेरी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया था। जांच के आधार पर ग्राम रोजगार सेवक अंकित दीक्षित, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी सुनील कुमार और उदयनारायन दोहरे, तकनीकी सहायक जलील बक्स सिद्दीकी और ग्राम प्रधान गीता देवी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने सभी आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के क्रम में कुठौन्द थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और 316(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की जा रही प्रशासन के अनुसार, ग्राम पंचायत में मनरेगा के विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। फर्जी नाम दर्ज कर जॉब कार्डों से भुगतान निकाला गया, जिससे सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संबंधित दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की जा रही है। आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और गबन की गई सरकारी धनराशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्रवाई से जिले में मनरेगा कार्यों को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। अन्य ग्राम पंचायतों में भी मनरेगा कार्यों की जांच तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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