सिद्धार्थनगर में जल जीवन मिशन के ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच जांच प्रक्रिया भी विवादों में घिर गई है। स्थानीय निवासियों की शिकायत पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम सोमवार, 30 मार्च को जांच के लिए पहुंची, लेकिन मौके पर हुई कार्रवाई ने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया। यह शिकायत मुख्य रूप से विकासखंड नौगढ़ के बेलवा सिरवत, बरगदवा पकड़ी, विकासखंड जोगिया के सेहुड़ा तथा विकासखंड शोहरतगढ़ के टेडिया कौवा, कपिया ग्रांट और अलिदापुर गांवों से संबंधित थी। इन गांवों में पाइपलाइन बिछाने और सड़क तोड़ने के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। जांच टीम में जल निगम विभाग के अपर अभियंता अवधेश कुमार, डीपीएमयू राजेश कुमार मिश्रा और डीपीएम अभिषेक शामिल थे। टीम सबसे पहले बेलवा गांव पहुंची, जहां इंटरलॉकिंग सड़क को खुदवाकर एचडीपीई पाइप की गहराई की जांच की गई। मौके पर पाइप की गहराई लगभग 33 इंच पाई गई, जबकि मानक के अनुसार इसे 40 इंच होना चाहिए था। इससे निर्माण कार्य में स्पष्ट लापरवाही सामने आई।
ग्रामीणों ने बताया कि बेलवा गांव में पाइपलाइन डालने के दौरान इंटरलॉकिंग सड़क को पूरी तरह तोड़ दिया गया था। कंपनी द्वारा इसे ठीक कराने की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण गांव के लोगों को खुद ही मेहनत कर सड़क को किसी तरह चलने लायक बनाना पड़ा। सबसे अहम बात यह रही कि जांच टीम बिना किसी आवश्यक दस्तावेज के मौके पर पहुंची। उनके पास न कार्य से संबंधित पत्रावली थी, न भुगतान रजिस्टर और न ही कार्य रजिस्टर। इसके अलावा, मौके पर कोई लेबर भी उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे सही तरीके से खुदाई कर जांच की जा सके। जांच टीम के साथ जैक्सन लिमिटेड कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

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