मेरठके सकौती में आयोजित महाराजा सूरजमल की मूर्ती अनावरण के कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के संसथापाक रामावतार पलसानिया द्वारा जाट समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए। कार्यक्रम में सामाजिक सुधार, शिक्षा, एकता और आरक्षण जैसे मुद्दों पर विशेष जोर देने के साथ कुल 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से रखे गए। जिनका उद्देश्य जाट समाज को संगठित, शिक्षित और जागरूक बनाना बताया गया।
युवाओं और शिक्षा पर विशेष फोकस
सभा में जाट समाज के युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ने पर बल दिया गया। प्रस्ताव रखा गया कि युवाओं को जाट महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि मनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे उनमें सामाजिक गर्व और जागरूकता बढ़े। इसके साथ ही युवाओं को टेक्निकल और स्किल एजुकेशन के साथ उच्च शिक्षा एवं स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने का संकल्प लिया गया।
समाज सुधार और नशा मुक्ति अभियान
नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए “नशा मुक्त जाट समाज” अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा गया। युवाओं में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही समाज में भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए 36 बिरादरियों के साथ सामंजस्य बनाने और किसी भी अन्य समाज के खिलाफ टिप्पणी न करने का संकल्प भी लिया गया।
राजनीतिक और सामाजिक मांगें
सभा में दीनबंधु सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। इसके अलावा जिन राज्यों में जाट समाज को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है, वहां इसके लिए प्रयास तेज करने का प्रस्ताव भी रखा गया। जाट महापुरुषों के इतिहास को CBSE, NCERT सहित राज्य और केंद्रीय पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग भी की गई।
एकता और नेतृत्व पर जोर
कार्यक्रम में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि जाट समाज के नेता और उच्च पदों पर बैठे अधिकारी निःस्वार्थ भाव से समाज के लोगों की मदद करें। क्षेत्रवाद और गोत्रवाद से ऊपर उठकर वैश्विक स्तर पर जाट एकता स्थापित करने का आह्वान किया गया। सभा में अंतरजातीय विवाह पर पूर्ण विराम लगाने का प्रस्ताव रखा गया, वहीं बच्चों की शादी 23 से 25 वर्ष की आयु में करने की बात भी सामने आई।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रस्तावों को समाज के हित में बताते हुए उन्हें लागू करने की दिशा में कार्य करने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, एकता और जागरूकता के जरिए ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।

Leave a Reply