कानपुर के चुन्नीगंज में मौजूद अपोलो हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई। परिवार के लोगों ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर से मिलकर डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पिता ने बताया कि बच्चे के इंजेक्शन लगाते ही हालत बिगड़ी और दम तोड़ दिया। पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है। टीबी की बीमारी के चलते हालत हुई थी गंभीर गुरुसहाय गंज कन्नौज निवासी मो. राशिद ने बताया कि उनके 12 साल बेटे अर्सलान की टीबी की बीमारी होने के चलते तबियत खराब होने पर उसे 29 मार्च को चेस्ट के डॉक्टर संदीप कटियार के क्लीनिक में दिखाने गए थे। प्राथमिक जांच में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई, लेकिन डॉ. एस.के. कटियार के कहने पर बच्चे को अपोलो हॉस्पिटल चुन्नीगंज में शाम 5:30 बजे एडमिट कराया था। 5 हजार रुपए एडवांस लेने के बाद मेरे बच्चे को एडमिट कर लिया था। मेरे बेटे की तबियत पूरी तरह से ठीक थी, रात में खाना खाया और परिवार के लोगों से सामान्य तौर पर बातचीत भी करता रहा। अगले दिन यानी 30 अप्रैल को हॉस्पिटल प्रबंधन ने 20 हजार रुपए और जमा करने की बात कही। इसके बाद रुपए नहीं जमा करने पर हॉस्पिटल से इलाज बंद करने की भी चेतावनी दी। इस बात को लेकर परिवार के लोगों की हॉस्पिटल प्रबंधन से कहासुनी भी हुई। आरोप है कि सोमवार सुबह नर्स ने बच्चे को एक इंजेक्शन दिया, जबकि इंजेक्शन देने के बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो नर्स ने कहा कि सब ठीक हो जाएगा। इंजेक्शन लगने के बाद ही बच्चे के सीने में जलन और आंखे टेढ़ी होने लगी और तड़पने लगा। हॉस्पिटल प्रबंधन ने ठीक होने की बात कहकर टाल दिया और बच्चे ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। पीड़ित पिता मो. राशिद ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर मरीज के साथ लापरवाही बरतने और उसकी मौत का कारण बनने का आरोप लगाते हुए थाना कर्नलगंज में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। उनका कहना है कि ऐसी लापरवाही से दूर-दूर से इलाज कराने आए मरीजों की जान जोखिम में डाल दी जाती है। पिता बोले…पोस्टमॉर्टम नहीं कराना चाहते कर्नलगंज थाना प्रभारी ने बताया कि पिता की तहरीर पर मामले की जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बच्चे को टीबी की बीमारी थी। इस वजह से उसे इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट कराया था। अगर परिवार के लोग बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम कराते हैं तो मौत की वजह साफ हो जाएगी। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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