DniNews.Live

योगी बोले- शराब माफिया पहले पोषाहार वितरण कराता था:2017 के पहले पैसा लेकर ठेका दिया जाता था, नियुक्तियों में पर्ची-खर्ची चलती थी

लखनऊ में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा- 2017 के पहले पोषाहार का वितरण उत्तर भारत का सबसे बड़ा शराब माफिया करता था। सरकार ने पैसा लेकर इसका ठेका दिया था। मैं भौचक था कि शराब माफिया महिला एवं बाल विकास में घुसा हुआ है। सीएम ने कहा- मैंने पूछा शराब माफिया का यहां क्या काम। यह पाप कौन करता था, यह वही लोग है जो जाति के नाम पर समाज को बांटकर समाज को खराब करते हैं, बच्चों के पोषाहर पर डाका डालते हैं। एक शराफ माफिया के बहाने डाका डालते थे। सीएम योगी सोमवार को लोकभवन में 69,804 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं को स्मार्टफोन वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों की नई डिजाइन का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में दो लाख से अधिक ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस भी वितरित किए गए। साथ ही 18,440 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए। इसके अलावा, सीएम ने 450 करोड़ रुपये की लागत से 3,170 आंगनबाड़ी केंद्र भवनों और 140 बाल विकास परियोजना कार्यालय भवनों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। पढ़िए सीएम योगी की प्रमुख बातें… 1- यूपी बीमारू था क्योंकि बच्चे कुपोषित थे सीएम योगी ने कहा- 2017 से पहले पोषाहार पर शराब माफिया के माध्यम से डकैती डाली जाती थी। सब काम शराब माफिया करता था। कहीं पोषाहार पहुंचता था कहीं नहीं पहुंचता था। इतनी खराब गुणवत्ता थी कि खाने की स्थिति नहीं थी, इसलिए यूपी बीमारू था, जब बचपन ही कुपोषित हो तो राज्य को बीमारू होना था। यह पाप कौन करता था, यह वही लोग है जो जाति के नाम पर समाज को बांटकर समाज को खराब करते हैं, बच्चों के पोषाहर पर डाका डालते हैं। एक शराब माफिया के बहाने डाका डालते थे। 2- नियुक्तियों में पर्ची और खर्ची चलती थी उन्होंने कहा- ये जितनी नियुक्तियां हुई है, कितनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र वितरित किए जा रहे हैं, मैं गारंटी के साथ कह सकता हूं कि एक भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने न सिफारिश कराई होगी ना किसी को पैसा दिया होगा। क्या यह 2017 के पहले संभव था, नहीं संभव था। यदि उस समय प्रक्रिया शुरू हुई होती तो एक का भी चयन नहीं होता, क्योंकि आप पैसा नहीं दे सकती थी इसलिए उस समय यह संभव नहीं था। सिफारिश और पैसा दोनों चलता था, पर्ची और खर्ची भी चलती थी। तब ये लोग प्रदेश के साथ सौदेबाजी करते थे, गरीबों के हक पर डकैती डालते थे। कुपोषित माता बच्चों के हक पर डैकती डालते थे। आज मंच पर खड़े होकर ये लोग भाषण देते हैं तो हमें उन पर हंसी आती है। 3- मैं 4 साल से विभाग को स्मार्ट बनाने में लगा था सीएम ने कहा- पिछले 4 वर्ष से विभाग के पास पड़ा हूं कि हर कार्यकत्री के पास स्मार्टफोन होना चाहिए। वे जो करती हैं उसका रियल टाइम डेटा हमें समय पर नहीं हो पाती है। इसलिए हमारी रैंकिंग नीचे चली जाती है। इसलिए आवश्यक है कि उनके पास स्मार्टफोन हो और वे इसमें पारंगत हों। आंगनबाड़ी केंद्र के नवीन डिजाइन का भी विमोचन हुआ है। आपकी भूमिका कितनी बढ़ने वाली है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के शिक्षा की व्यवस्था भी आंगनबाड़ी में होने वाली है। यानी छह वर्ष की उम्र तक बच्चे की शिक्षा होनी है। 4- नई शिक्षा नीति में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बड़ी जिम्मेदारी योगी ने कहा- नई शिक्षा नीति में 3 से 5 वर्ष के लिए आंगनबाड़ी केंद्र में ही प्री-प्राइमरी स्कूल का संचालन होना है इसलिए उसे कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। पहले केंद्र जो बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल परिसर में चलते थे उनके लिए नए भवन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी बाड़ी केंद्र को प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। 5- आप यशोदा मैया की भूमिका में हैं… सीएम ने कहा- यशोदा मैया ने कृष्ण कन्हैया के लिए की थी, वही भूमिका आपके लिए है। यह बहुत बड़े सम्मान की बात है। उस सम्मान की गरिमा की रक्षा करना, उसके अनुरूप देश के भविष्य को गढ़ना, उसे आगे बढ़ाना, उसकी नींव को मजबूत करना, आपके जिम्मे है। भारत के भविष्य को संवारने और पीएम के विजन को चलाए जाने का यह अभियान है। अगर नवजात शिशु और उसकी मां स्वस्थ है तो समझिए भारत का भविष्य उज्जवल है। जितने भी आंगनबाड़ी कार्यकत्री औ सहायिकाएं हैं, वह सरकार की योजनाओं के संचालन के सारथी हैं। यशोदा मैया की भूमिका को संभाल रहीं साथ ही बीमारी रूपी कुपोषण से निपटने के लिए एक सारथी की भूमिका में हैं। मंत्री ने कहा- बच्चों के नाटेपन में 6.6 प्रतिशत की कमी आई महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबीरानी मौर्या ने कहा- 1 करोड़ 56 लाख लाभार्थियों के लिए घर-घर पुष्टाहार पहुंचा रहे हैं। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि विश्वास का प्रतीक है जो सरकार घर-घर पहुंचा रही। बच्चों का नाटापन 6.6 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने बताया- बड़ी संख्या में नई नियुक्तियां आई है। 19 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई है और 3 हजार से अधिक सहायिकाओं का प्रमोशन किया गया है। 69 हजार से अधिक स्मार्टफोन से डिजिटल सशक्तिकरण की शुरुआत हुई है। ____________ ये खबर भी पढ़ें… बहू को नहीं देना होगा सास-ससुर का भरण पोषण:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता की मांग अस्वीकार की, कहा- ऐसा कानून नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुजुर्ग दंपती के बहू से मेंटेनेंस का दावा करने वाली याचिका खारिज को कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी बहू से भरण पोषण पाने का कानूनी अधिकार सास-ससुर को नहीं हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण पोषण पाने वालों की सूची में सास या ससुर को शामिल नहीं किया गया है। यह फैसला न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

Puri Khabar Yahan Padhein…

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *