माफिया मुख्तार अंसारी को विचरण न्यायालय से पहली सजा दिलाने वाले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) नीरज कुमार श्रीवास्तव 60 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने लगभग 18 साल के अपने कार्यकाल में 3000 से अधिक आपराधिक मुकदमों का संचालन किया और सौ से ज्यादा अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई। श्रीवास्तव उस समय सुर्खियों में आए जब उच्च न्यायालय के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए एमपी-एमएलए कोर्ट का गठन किया गया। गाजीपुर में पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह से जुड़े मामलों की सुनवाई शुरू हुई। तत्कालीन जिलाधिकारी आर.के. अग्रवाल ने राज्य की ओर से पैरवी के लिए नीरज कुमार श्रीवास्तव का चयन किया था। उन्होंने मुख्तार अंसारी को पहली सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साल 2007 में दर्ज गैंगस्टर मुकदमे में, जो अवधेश राय हत्याकांड और नंदकिशोर रूंगटा अपहरण-हत्या प्रकरण पर आधारित था, अदालत ने मुख्तार अंसारी को 10 साल और सहआरोपी भीम सिंह को 5 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, करंडा थाने के एक अन्य गैंगस्टर मामले में भी मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा मिली। साल 2005 में विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड से जुड़े मामले में 2007 में मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजाल अंसारी को भी एमपी-एमएलए कोर्ट गाजीपुर ने दोषी ठहराया था। इस फैसले के परिणामस्वरूप अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता भी समाप्त हो गई थी। अपने कार्यकाल के दौरान, श्रीवास्तव ने 2018-19 में एक नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को आजीवन कारावास दिलाना अपनी बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अभियोजन कार्यालय के तत्कालीन संयुक्त निदेशक दिलीप कुमार श्रीवास्तव, वर्तमान संयुक्त निदेशक आनंद पांडे, सहकर्मी देवेंद्र सिंह, तत्कालीन जिलाधिकारी आर.के. अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को दिया, जिन्होंने उन्हें निर्भीकता से कार्य करने में सहयोग किया। उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 2023 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मानित भी किया गया था।

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