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कानपुर जू के सांपों का शाही शौक:हर साल डकार जाते हैं 15 लाख के सफेद चूहे; एक ‘निवाले’ की कीमत 150 रुपए

आमतौर पर घर में चूहे दिख जाएं तो लोग लाठी-डंडा लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ते हैं या पिंजरा लगा देते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि ये न जाने कब कौन सा कीमती सामान कुतर डालें। कई बार लोग विकल्प के रूप में सफेद चूहों का भी इस्तेमाल करते है। कानपुर में इन्हीं सफेद चूहों का एक बड़ा बाजार भी है, जहां इनकी भारी डिमांड है। हैरान करने वाली बात ये है, कि कानपुर चिड़ियाघर में इन सफेद चूहों को खिलाने के लिए हर साल करीब 15 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। यह कोई फिजूलखर्ची नहीं बल्कि चिड़ियाघर के मेहमानों यानी सांपों की सेहत का राज है। सांपों की थाली में सज रहे सफेद चूहे: कानपुर चिड़ियाघर के सांप घर में रहने वाले करीब 50 जहरीले और गैर-जहरीले सांपों का पसंदीदा भोजन ये सफेद चूहे ही हैं। चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, एक स्वस्थ सांप को उसके आकार के हिसाब से एक से तीन चूहे डाइट में दिए जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये कोई गली-मोहल्ले के आम चूहे नहीं होते, बल्कि विशेष रूप से पाले गए सफेद चूहे होते हैं। जू प्रशासन इसके लिए बाकायदा रजिस्टर्ड सप्लायरों से चूहों की खेप मंगवाता है, ताकि सांपों को मिलने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित और संक्रमण मुक्त रहे। सर्दियों में ‘फास्टिंग’ और गर्मियों में ‘दावत’ कानपुर जू के डायरेक्टर डॉक्टर कन्हैया पटेल बताते हैं, कि सांपों का खान-पान मौसम के हिसाब से बदलता रहता है। सर्दियों के तीन महीनों में जब सांप हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) में चले जाते हैं, तब वे कुछ नहीं खाते। लेकिन जैसे ही गर्मी की आहट होती है और सांप बाड़ों में सक्रिय होते हैं, उनका फीडिंग शेड्यूल शुरू हो जाता है। वर्तमान में साप्ताहिक आधार पर करीब 50 चूहे मंगवाए जा रहे हैं। हर शनिवार को सांपों को खाना दिया जाता है, क्योंकि सोमवार को चिड़ियाघर बंद रहता है। ऐसे में भोजन के बाद सांपों को एकांत में उसे पचाने का पूरा समय मिल जाता है। कानपुर जू में हर साल 10 हजार से ज्यादा सफेद चूहों की खपत:
डॉ. कन्हैया पटेल ने बताया कि, कानपुर जू में गर्मी के सीजन में हर महीने करीब 320 चूहों की खपत होती है। वही, पूरे साल की बात करे तो करीब 10,250 सफेद चूहे की खपत होती है। उन्होंने कहा कि, एक सफेद चूहे की औसत कीमत लगभग 150 रुपये है। इस तरह से सालाना सफेद चूहों का बिल ही 15 लाख रुपये के पार पहुंच जाता है। यह रकम सुनकर भले ही हैरानी हो, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है, कि सांपों के प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। सफेद चूहे ही क्यों हैं सांपों की पहली पसंद?
जंगली चूहों के बजाय सफेद चूहों को चुनने के पीछे ठोस वजह ये हैं। कि वह इन्हें अच्छे से पचा लेते है। लैब या विशेष फार्म हाउस में तैयार ये चूहे पूरी तरह बीमारियों और परजीवियों से मुक्त होते हैं। इनमें कैल्शियम और प्रोटीन का संतुलन बहुत अच्छा होता है, जो सांपों के विकास के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा, चूहे का शिकार करते समय सांपों की ‘हंटिंग इंस्टिंक्ट’ यानी शिकार करने की प्राकृतिक प्रवृत्ति जीवित रहती है। सांप के आकार के हिसाब से छोटे से लेकर वयस्क चूहों तक का चुनाव किया जाता है, जिससे उनके शरीर की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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