उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित भरतमुनि नाट्य समारोह के तीसरे दिन रविवार शाम सुप्रसिद्ध नाटक ‘बकरी’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। यह प्रस्तुति सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि समाज में भावनाओं, आस्था और भोलेपन के नाम पर होने वाले राजनीतिक शोषण को उजागर करती है। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित इस समारोह में प्रख्यात साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की चर्चित रचना पर आधारित इस नाटक का निर्देशन डॉ. शिशु कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. धनञ्जय चोपड़ा, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (प्रशासन) डॉ. आदित्य श्रीवास्तव और उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। नाटक ‘बकरी’ की कहानी तीन युवकों—दुर्जन सिंह, कर्मवीर और सत्यवीर—के इर्द-गिर्द घूमती है। ये युवक अपराध की दुनिया छोड़कर ठगी के नए तरीके अपनाते हैं। वे एक दलित की बकरी चोरी करवाकर उसे महात्मा गांधी की बकरी बताते हैं। इसके बाद वे भोली-भाली जनता से दान इकट्ठा करते हैं। इस कथा के माध्यम से नाटक में यह दिखाया गया कि कैसे नेता और ठग जनता की भावनाओं का शोषण कर उन्हें गुमराह करते हैं और अपने स्वार्थ सिद्ध करते हैं। नौटंकी शैली में प्रस्तुत इस नाटक में कजरी, सोहर और निर्गुण जैसे लोकगीतों का सशक्त प्रयोग किया गया, जिसने प्रस्तुति को और भी जीवंत बना दिया। नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से सच्चाई उजागर करती है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या केवल सच सामने लाना ही पर्याप्त है या बदलाव के लिए जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। अभिनय की बात करें तो दीवान की भूमिका में हर्ष अग्रवाल, दुर्जन सिंह के रूप में ओमेन्द्र पुरी गोस्वामी और कर्मवीर के रूप में हर्षल मेश्राम ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

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