मुरादाबाद, अमरोहा और धामपुर बस अड्डों से संचालित अनुबंधित बसों के भुगतान को लेकर बस संचालकों में नाराजगी बढ़ रही है। बस मालिकों का आरोप है कि परिवहन निगम तय नियमों के अनुसार दो माह के बजाय हर 15 दिन में आय का हिसाब तैयार कर रहा है, जिससे उन्हें हर महीने आर्थिक नुकसान हो रहा है। अनुबंधित बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन, मुरादाबाद के संरक्षक महेंद्र सिंह बग्गा ने बताया कि साधारण बस अनुबंध योजना-2022 के अनुबंध पत्र में यह स्पष्ट प्रावधान है कि बसों की आय का अंतिम मूल्यांकन प्रत्येक दो महीने बाद किया जाए। इसके बाद बची हुई अतिरिक्त आय को परिवहन निगम और बस मालिक के बीच बराबर बांटा जाना चाहिए। बग्गा के अनुसार, वर्तमान में निगम केवल 15 दिन के अंतराल पर ही बिल तैयार कर लेता है। यदि इस अवधि में किसी बस की आय 75 प्रतिशत से अधिक दर्ज होती है, तो परिवहन निगम पांच हजार रुपये की राशि काट लेता है। बस संचालकों का कहना है कि दो महीने का संयुक्त हिसाब न होने के कारण उन्हें जमा की गई अतिरिक्त रकम का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बस मालिकों का दावा है कि इस प्रक्रिया के कारण उन्हें हर माह करीब तीन लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उनका यह भी कहना है कि अब तक किसी भी अनुबंधित बस संचालक को अतिरिक्त आय का हिस्सा वापस नहीं मिला है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। वहीं, एआरएम वित्त बीएल मिश्रा ने इस संबंध में बताया कि दो माह में आय की गणना से संबंधित पुरानी व्यवस्था अब लागू नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अनुबंधित बस मालिकों को नियमानुसार भुगतान किया जाता है और एमएसटी किराये की पूरी धनराशि भी उनके खाते में जोड़ी जाती है। बस संचालकों ने परिवहन निगम से इस मामले में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और भुगतान प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है।

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