वाराणसी नगर निगम द्वारा डोमरी गांव में गंगा तट पर विकसित किए जा रहे मियावाकि वन की तारीफ की है। प्रधानमंत्री ने मन की बात के 132वें संस्करण में हाल ही में नगर निगम के एक घंटे के अंदर 2.51 लाख पौधे लगाकर वर्ल्ड रिकार्ड बनाने को सराहा। उन्हें इसे जनभागीदारी का उत्कृष्ट उद्धरण करार दिया तो सभी से काशी से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होंने कहा जब समाज के सभी वर्ग एक साथ मिल जाते हैं, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। उन्होंने इस अभियान को ‘एक पेड़ मां के नाम’ मुहिम से जोड़ते हुए देशवासियों को इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने मन की बात में की सराहना प्रधानमंत्री ने 132वें मन की बात संस्करण में कहा – काशी ने न केवल अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोया है। बल्कि पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दुनिया का नेतृत्व करने की अपनी क्षमता सिद्ध की है। इस महाभियान की सफलता के पीछे महीनों की सूक्ष्म तैयारी और हजारों हाथों का सामूहिक श्रम था। इसमें सेना, एनडीआरएफ, यूपी पुलिस, एनसीसी कैडेट्स, स्वयंसेवी संगठनों और स्कूली बच्चों ने मिलकर इसे एक वास्तविक जन-आंदोलन में तब्दील कर दिया। उन्होंने कहा नगर निगम ने परंपरा को सनाया है। उनके इस उद्बोधन से नगर निगम और पूरे काशी में हर्ष का माहौल है। जनभागीदारी से पा सकते हैं बड़े से बड़ा लक्ष्य इस मौके पर महापौर अशोक तिवारी ने हर्ष जाहिर किया। उन्होंने कहा – काशी के इस ऐतिहासिक प्रयास को वैश्विक पटल पर पहचान मिलना हम सभी के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन का ही सुखद परिणाम है। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में इस अभियान की सराहना करना हमारे पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को और अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। काशी ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि जनभागीदारी से बड़े से बड़ा लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। नगर निगम का बनेगा आर्थिक मॉडल मन की बात में जिक्र के बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कहा – डोमरी-सूजाबाद में मात्र एक घंटे के भीतर 2.51 लाख पौधों का रोपण हमारी टीम की सूक्ष्म योजना और तकनीक के सटीक समन्वय की जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना हमारे नगर निगम परिवार के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक है। यह प्रोजेक्ट न केवल काशी को ‘ऑक्सीजन बैंक’ देगा, बल्कि भविष्य में नगर निगम के लिए एक आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडल भी साबित होगा। हम इस हरित क्षेत्र की ड्रोन और स्मार्ट सिंचाई के जरिए निरंतर निगरानी सुनिश्चित कर रहे हैं। नगर निगम के लिए बनेगा आय का स्रोत नगर आयुक्त ने बताया – यह परियोजना केवल पर्यावरण सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक मॉडल का भी अनूठा उदाहरण है। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत, तीसरे वर्ष से ही निगम को 2 करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक 7 करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंच सकती है। यहां शीशम, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद जैसे फलदार और अश्वगंधा, गिलोय जैसी औषधियाँ भी लगाई गई हैं। स्मार्ट सिंचाई’ और ड्रोन से निगरानी नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया – गिनीज बुक रिकॉर्ड को प्रमाणित करने के लिए तकनीक का भरपूर उपयोग किया गया । इस क्रम।में स्मार्ट सिंचाई के लिए 10 बोरवेल और 360 रेन गन सिस्टम के जरिए पौधों को प्राकृतिक वर्षा की तरह पानी दिया जा रहा है। पूरे 350 बीघा क्षेत्र को 60 सेक्टरों में बांटा गया, जिनके नाम काशी के प्रसिद्ध घाटों (जैसे दशाश्वमेध, मणिकर्णिका) पर रखे गए। 500 वॉलंटियर्स और ड्रोन की मदद से हर पौधे की गिनती और निगरानी की गई थी

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