मिर्जापुर के विंध्याचल धाम स्थित रामनाम बैंक में चैत्र नवरात्र के दौरान आस्था का अनोखा उत्साह देखने को मिला। 9 दिनों में यहां 7.70 करोड़ रामनाम जमा हुए, जबकि इस दौरान करीब 5 हजार नए भक्त सदस्य बने। पिछले 12 वर्षों से संचालित यह बैंक श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रामनाम बैंक अपनी अनोखी अवधारणा के लिए जाना जाता है। यहां धन के बजाय ‘रामनाम’ जमा किया जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यह पूंजी इहलोक में जमा होती है और उसका फल परलोक में मिलता है। इसी विश्वास के कारण नवरात्र में बड़ी संख्या में भक्त इस बैंक से जुड़े। ‘राम’ या ‘सीताराम’ किसी भी भाषा में मान्य बैंक के प्रबंधक महेंद्र पाण्डेय ने बताया कि ‘राम’ या ‘सीताराम’ किसी भी भाषा में लिखा गया हो, उसे स्वीकार किया जाता है। उन्होंने बताया कि बैंक की सदस्यता पूरी तरह निःशुल्क है। बैंक की ओर से श्रद्धालुओं को रामनाम लिखने के लिए विशेष पुस्तिकाएं दी जाती हैं, जो भर जाने पर मुफ्त में बदली जाती हैं। रामनाम से मिलती है आत्मिक शांति महेंद्र पाण्डेय ने सनातन संस्कृति में राम नाम के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने डाकू अंगुलिमाल से महर्षि वाल्मीकि बनने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि रामनाम का स्मरण व्यक्ति को आत्मिक शांति देता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। कई राज्यों से जुड़े हैं भक्त इस रामनाम बैंक से केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के श्रद्धालु जुड़े हुए हैं। दूर-दराज के भक्त अपनी आस्था की इस पूंजी को कोरियर के माध्यम से भी बैंक में जमा करते हैं। आस्था के साथ आत्मबल का भी विश्वास श्रद्धालुओं का मानना है कि रामनाम की यह जमा पूंजी केवल आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन में आत्मबल, सकारात्मकता और मानसिक शांति भी बढ़ाती है। यही वजह है कि यह अनोखी परंपरा हर साल और अधिक लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

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