मेरठ में साइबर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति से 38 लाख रुपये की ठगी की है। ठगों ने पीड़ित को आतंकवाद के मामले में फंसाने की धमकी देकर पांच दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और इस दौरान उससे पैसे ट्रांसफर करवा लिए। पीड़ित मदनपाल ने बताया कि उन्हें एक कॉल आया था, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि एक छापेमारी में मदनपाल के दस्तावेज संदिग्ध गतिविधियों में पाए गए हैं और वह एक गंभीर मामले में फंस सकते हैं। इसके बाद मदनपाल पर लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने और जांच में सहयोग करने का दबाव बनाया गया। ठगों ने उन्हें इतना डरा दिया कि वह उनकी हर बात मानने लगे। उन्हें यह भी भरोसा दिलाया गया कि जांच में सहयोग करने पर उन्हें क्लीन चिट मिल जाएगी। इसी दौरान, ठगों ने उनसे अलग-अलग तरीकों से उनके बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करवा लिए। लगभग पांच दिनों तक चले इस पूरे घटनाक्रम में पीड़ित से कुल 38 लाख रुपये ठग लिए गए। जांच में सामने आया है कि साइबर ठग अक्सर पीड़ितों की ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया प्रोफाइल के आधार पर उन्हें निशाना बनाते हैं। मदनपाल भी इंटरनेट पर निवेश से जुड़ी जानकारी खोज रहे थे और सोशल मीडिया पर सक्रिय थे, जिससे ठगों को उनकी प्रोफाइल का अनुमान हो गया। ठगों ने मदनपाल को लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखा। उन्हें डराने के लिए फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध तस्वीरें भी भेजी गईं। लगातार धमकियों, डांट-फटकार और देशभक्ति के नाम पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उन्हें इतना कमजोर कर दिया गया कि वह यह समझ ही नहीं पाए कि उनके साथ क्या हो रहा है। पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर गैंग की तलाश में जुट गई है।

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