लखनऊ में उत्तर भारत की लोकप्रिय नाट्य संस्था बफ़्टा का तीन दिवसीय नाट्य उत्सव ‘नाट्य निर्वाण सीजन 2’ संपन्न हो गया। उत्सव का समापन संत गाडगे ऑडिटोरियम में संगीतमय दास्तान ‘धनुष यज्ञ’ के मंचन, रंगमंच के दिग्गजों पर परिचर्चा और ‘दी थेस्पियन’ लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सेरेमनी के साथ हुआ। उत्सव के तीसरे दिन युवा निर्देशक शुभम के निर्देशन में ‘धनुष यज्ञ’ प्रस्तुत किया गया। विनीता मिश्रा और पल्लवी राज की जोड़ी ने रामायण के सीता स्वयंवर प्रसंग को जीवंत किया। कलाकारों ने राम, सीता, लक्ष्मण, परशुराम और दशरथ सहित कई किरदारों को सहजता से निभाया। हर दृश्य पर तालियों की गूंज सुनाई दी खचाखच भरे प्रेक्षागृह में कलाकारों के ऊर्जावान और भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आकर्षक वेशभूषा, सटीक प्रकाश व्यवस्था और मधुर संगीत ने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया, जिस पर हर दृश्य पर तालियों की गूंज सुनाई दी। शाम को रंगमंच के दिग्गजों इब्राहीम अल्काज़ी और बादल सरकार की जन्मशताब्दी के अवसर पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें सलीम आरिफ, तारिक खान, अनिल रंजन भौमिक और डॉ. विधु खरे दास ने उनके योगदान पर विचार साझा किए। अल्काज़ी की शिष्या और अभिनेत्री नादिरा बब्बर ने भी अपने अनुभव बताए। कॉमिक प्ले ‘मरहूम की याद में’ प्रस्तुत किया इसके बाद बफ़्टा की ‘दी थेस्पियन’ लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सेरेमनी हुई। वरिष्ठ लेखक जावेद सिद्दीकी और अभिनेत्री नादिरा बब्बर को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। समारोह में बफ़्टा के संस्थापक तारिक खान, अध्यक्ष डॉ. अफरोज जहां और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। उत्सव में कलाकार तारिक ने शाम में कॉमिक प्ले ‘मरहूम की याद में’ प्रस्तुत किया। मशहूर लेखक पत्रास बोखारी की कहानी पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को एक घंटे तक हंसाया, जो कलाकार की बेहतरीन टाइमिंग और प्रस्तुति रहा।

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