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Middle East में युद्ध के संकट के बीच India के लिए Good News, सुरक्षित निकले LPG टैंकर

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं और इसी कड़ी में इशाक डार ने इस्लामाबाद में अपने समकक्षों के साथ अहम बैठक की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस बैठक में मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया, जबकि आगामी चार देशों के सम्मेलन में सऊदी अरब भी शामिल रहेगा।
बता दें कि इस बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर विस्तार से चर्चा हुई और सभी देशों ने संयम बरतने, तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़े हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच, मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक तरफ बातचीत की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हमले की तैयारी भी चल रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, उन्होंने इसे दोहरी रणनीति बताते हुए क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है।
गौरतलब है कि हालात उस समय और गंभीर हो गए जब ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कुछ औद्योगिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। दूसरी तरफ इजरायल ने भी दावा किया है कि उसके क्षेत्र में ईरान की ओर से नई मिसाइलें दागी गई हैं, जिससे संघर्ष और तेज हो गया है।
इस बीच सुरक्षा कारणों से अमेरिकी विश्वविद्यालय बेरूत ने अगले दो दिनों के लिए अपनी पढ़ाई ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सीधे खतरे के संकेत नहीं हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है।
गौरतलब है कि यमन के हूती समूह के हमलों ने भी इस संकट को और जटिल बना दिया है। फ्रांस ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बहरीन ने समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात के समय समुद्री आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए उठाया गया है।
इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि एलपीजी से भरे दो भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और जल्द ही देश पहुंचने वाले हैं। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है।
एक तरफ कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन दूसरी ओर जमीनी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष और बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
Source: Prabha Sakshi via DNI News (Prayagraj)

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