गोरखपुर में आपदा न्यूनीकरण को प्रभावी बनाने और ग्राउंड लेवल पर तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से रविवार को राजस्व विभाग की कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सभी उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक सहित कुल 146 अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला में योजना निर्माण, जोखिम प्रबंधन और जागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई। राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ डॉ. भानु प्रताप मल्ल ने ग्राम आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि गांवों में उपलब्ध भौतिक और मानवीय संसाधनों की सही पहचान और मैपिंग से आपदा के समय तेजी से और बेहतर रिस्पॉन्स दिया जा सकता है।
डेवलपमेंट प्लानिंग में आपदा प्रबंधन को जोड़ने की सलाह डॉ. मजहर रसीदी ने कहा कि विकास योजनाओं को बनाते समय आपदा न्यूनीकरण को अनिवार्य रूप से शामिल करना जरूरी है। उन्होंने संभावित जोखिमों का पूर्व आकलन कर योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया। दूसरे सत्र में उन्होंने जोखिम विश्लेषण और उससे निपटने की रणनीतियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। डॉ. सिराज वजीह ने गोरखपुर पर आधारित अध्ययन प्रस्तुत करते हुए जल संरक्षण, हरियाली और पौधरोपण को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज के प्रभावों को देखते हुए सभी योजनाओं में जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को शामिल करना जरूरी है।
गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के निर्देश कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीत कुमार सिंह ने सभी तहसीलों को निर्देश दिया कि ग्राम स्तर की बैठकों में आम लोगों को आपदा से बचाव के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर जानकारी और जागरूकता से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे गौतम गुप्ता ने जनपद में पिछले वर्षों में हुई आपदाओं और उनसे निपटने के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अनुभवों से सीख लेकर भविष्य की तैयारियों को और मजबूत करना जरूरी है।

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