शहर की लाइफलाइन बन चुकी कानपुर मेट्रो अब सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि हुनर दिखाने का बड़ा मंच भी बनती जा रही है। रविवार दोपहर बड़ा चौराहा मेट्रो स्टेशन का नजारा बदला-बदला सा था। यहाँ ट्रेनों की आवाजाही के बीच अचानक फिल्मी तरानों की गूंज सुनाई देने लगी। मौका था ‘शो योर टैलेंट’ पहल के तहत आयोजित एक सांस्कृतिक शाम का, जहाँ स्थानीय कलाकारों ने अपनी गायकी और डांस से यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीत-संगीत की महफिल, ‘मेरे सपनों की रानी’ पर थिरके कदम दोपहर करीब 1:30 बजे जैसे ही मंच सजा, संगीत की महफिल शुरू हो गई। कलाकारों ने एक के बाद एक सदाबहार नगमे छेड़कर समां बांध दिया। ‘बचना ऐ हसीनों’ और ‘आफरीन आफरीन’ जैसे गानों पर युवाओं ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा। ‘आओ हुजूर तुमको सितारों पर ले चलूं’ और ‘मेरे सपनों की रानी’ जैसे गानों ने पुराने दौर की यादें ताजा कर दीं। स्टेशन से गुजर रहे यात्री अपनी ट्रेन छोड़ कुछ देर के लिए इन सुरीली आवाजों के साथ गुनगुनाते नजर आए। नन्हे डांसर्स का जलवा,तालियों से गूंज उठा स्टेशन गायन के बाद बारी थी नृत्य प्रस्तुतियों की। छोटे-छोटे बच्चों ने फिल्मी गानों पर ऐसी ऊर्जा दिखाई कि दर्शक दंग रह गए। नन्हे कलाकारों के स्टेप्स और उनके आत्मविश्वास ने स्टेशन पर मौजूद भीड़ का दिल जीत लिया। ‘एकांत की तलाश’ संस्था के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में हर उम्र के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। सिर्फ सफर नहीं, कल्चरल हब भी है मेट्रो कानपुर मेट्रो की इस खास पहल ‘शो योर टैलेंट’ का मकसद शहर के उभरते हुए कलाकारों को एक बड़ा और पब्लिक प्लेटफॉर्म देना है। बड़ा चौराहा जैसे व्यस्त स्टेशन पर इस तरह के आयोजनों से न केवल यात्रियों का मनोरंजन हो रहा है, बल्कि शहर की कला और संस्कृति को भी बढ़ावा मिल रहा है। मेट्रो प्रशासन अब सुरक्षित और आरामदायक सफर के साथ-साथ स्टेशनों को ‘कल्चरल हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

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