शहर में गर्मी की दस्तक के साथ ही मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे रोगों को पैर पसारने से रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभी से तगड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने शहर के 165 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) को खास ट्रेनिंग दी, ताकि जमीनी स्तर पर मरीजों की पहचान और इलाज में कोई देरी न हो। अस्पतालों में मुस्तैदी, जांच किट और दवाओं का स्टॉक पहुंचा सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उर्सला, काशीराम, केपीएम और हैलट जैसे बड़े अस्पतालों के साथ-साथ सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रेपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट, स्लाइड और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। अगर कहीं भी मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिलता है, तो उसे तत्काल इलाज देने के निर्देश दिए गए हैं। अप्रैल से शुरू होगा बड़ा अभियान, घर-घर जाकर खत्म होगा ‘लार्वा’ अगले महीने यानी अप्रैल से पूरे जिले में विशेष संचारी रोग अभियान शुरू होने जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य सरकारी विभाग मिलकर काम करेंगे। टीम न केवल मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करेगी, बल्कि जहां पानी जमा है वहां लार्वीसाइड दवा का छिड़काव भी किया जाएगा। शहरी इलाकों में विशेष सर्विलांस और रिपोर्टिंग पर जोर दिया जा रहा है ताकि बीमारी को फैलने से पहले ही रोका जा सके। प्राइवेट और सरकारी डॉक्टर एक साथ, CHO को मिला नया ‘प्रोटोकॉल’ मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के लिए केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर के डॉक्टरों को भी तैयार किया जा चुका है। रविवार को आयोजित कार्यशाला में सीएचओ को केंद्र सरकार के नए ‘ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल’ की विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने फील्ड में आने वाली चुनौतियों, मलेरिया-डेंगू की समय पर पहचान और केस मैनेजमेंट के गुर सिखाए। साथ ही सामुदायिक जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।

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