लखनऊ के कैफ़ी आज़मी अकादमी में पुस्तक का हुआ विमोचन। शालिनी सिंह के कविता संग्रह ‘धूप के बंद दरवाजे’ कार्यक्रम में साहित्यकारों का जमावड़ा लगा। मंच संचालक सलमान खयाल ने किताब को शालिनी सिंह की मेहनत और काबिलियत का संग्रह बताया। लेखकीय वक्तव्य हेतु आमंत्रित किया। शालिनी ने बताया कि साहित्य कमजोरों की कर्मभूमि है और साहित्यकार की आवाज़ होती है। पुस्तक में लोकगीतों के प्रभाव का उल्लेख किया, कोविड काल की स्मृतियों को साझा किया और वर्तमान दौर में सांप्रदायिकता की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। समाज और सत्ता को अपने संग्रह से तीन कविताओं ‘धूप के बंद दरवाजे’, ‘यात्राओं के अनुवाद’ और ‘आकार में छोटी हर चीज़ स्त्रीलिंग नहीं होती’ का पाठ किया। कविता संग्रह पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सीमा सिंह ने कहा कि शालिनी की कविताओं में स्त्री चेतना के साथ व्यापक सामाजिक सरोकार भी मौजूद हैं। कविताओं में सवालों के साथ हठ भी है। प्रेम कविताओं और प्रकृति चित्रण की सराहना करते हुए कहा कि धर्म और राजनीति पर लिखना साहस का काम है।

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