चित्रकूट जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर रविवार को शास्त्री नगर स्थित राजपूत शिक्षा मंदिर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, जानकीकुंड और सेवा भारती के सहयोग से आयोजित हुआ। भाजपा जिला अध्यक्ष महेंद्र कोटार्य ने फीता काटकर इसका शुभारंभ किया और मां सरस्वती के चित्र पर पूजन-अर्चन किया। शिविर में कुल 356 लोगों की आंखों की जांच की गई। इनमें से 150 जरूरतमंदों को मौके पर ही निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, 102 लोगों को आई ड्रॉप और लगभग 100 लोगों को आवश्यक दवाएं भी दी गईं। जांच के दौरान 20 मरीजों में मोतियाबिंद की पहचान हुई। इनमें से 14 मरीजों को ऑपरेशन के लिए जानकीकुंड चिकित्सालय रेफर किया गया है। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष महेंद्र कोटार्य ने कहा कि शास्त्री नगर वार्ड के शोभा सिंह का पुरवा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की बस्ती होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे शिविरों को आवश्यक बताया। कोटार्य ने सभासद शंकर प्रसाद यादव के प्रयासों की सराहना करते हुए अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की अपील की। सेवा भारती के महामंत्री राज किशोर शिवहरे ने जानकारी दी कि संस्था लगातार सेवा बस्तियों में शिविर आयोजित कर जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही है। साथ ही, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का कार्य भी कर रही है। उन्होंने समाज में समरसता, भाईचारे और नशा मुक्ति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। शिविर संयोजक एवं सभासद शंकर प्रसाद यादव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वे क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। चिकित्सालय टीम के प्रभारी उमाशंकर शुक्ल ने आंखों की नियमित जांच को बेहद आवश्यक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि 40 वर्ष की आयु के बाद दृष्टि कमजोर होना एक सामान्य प्रक्रिया है। जबकि 50 वर्ष के बाद मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए, विशेषकर डायबिटीज के मरीजों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। शिविर के सफल आयोजन में सेवा भारती के शिवकुमार, विद्यालय प्रबंधक जागेश्वर प्रसाद राजपूत, प्रधानाचार्या कल्पना राजपूत, प्रेमचंद यादव, कीर्ति सिंह, गीता मिश्रा, कन्हैया लाल सहित अन्य लोगों का विशेष योगदान रहा।

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