औरैया के दिबियापुर रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार, 29 मार्च को 114वां महोत्सव हवन यज्ञ और हितोपदेश के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर पानीपत से आए मुख्य वक्ता महोपदेशक आचार्य ओम प्रकाश ने सत्य के प्रचार-प्रसार और गलत धारणाओं को दूर करने पर जोर दिया। प्रेसवार्ता के दौरान आचार्य ओम प्रकाश ने कहा कि समाज के सामने सत्य लाना और गलत धारणाओं को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने आम लोगों को उपासना की विधि समझाने की बात भी कही। आचार्य ने बताया कि ईश्वर अनादि है और वही सृष्टि की रचना, पालन तथा संहार करते हैं। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा 10 अप्रैल 1875 को आर्य समाज की स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य समाज में सामंजस्य स्थापित करना था। आचार्य ओम प्रकाश ने स्पष्ट किया कि सनातन के अंतर्गत ईश्वर, आकाश, पाताल, पृथ्वी और प्रकृति आते हैं, जो अटल हैं। देश में पाखंड की पुरानी बीमारी का उल्लेख किया गया आचार्य ने यह भी कहा कि जन्म से सभी शुद्ध होते हैं, लेकिन उनकी पहचान कर्म के आधार पर होती है। उन्होंने देश में पाखंड की पुरानी बीमारी का उल्लेख करते हुए बताया कि दयानंद सरस्वती ने इसे दूर करने के हर संभव प्रयास किए, हालांकि 59 वर्ष की अल्पायु में उनका निधन हो गया। उनका मूल उद्देश्य कर्म पर आधारित रहा। इस कार्यक्रम में मोहित शास्त्री (भजन उपदेशक, बिजनौर), श्रीमती सावित्री देवी (भजन उपदेशिका, दिल्ली), अंजना गुप्ता (प्रधान), देवेश कुमार (मंत्री), कृष्ण कुमार दुबे (कोषाध्यक्ष), हरिशंकर शर्मा, कुक्कू ठाकुर, राजेंद्र आर्य सहित संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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