इटावा में उत्तर प्रदेश सरकार के आवाह्न पर आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा एक दिवसीय जनपद स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, फायर और मेडिकल एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में आपदा से बचाव, प्राथमिक उपचार और जन जागरूकता को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई। आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर विशेष प्रशिक्षण जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रेरणा सभागार, विकास भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों, शिक्षकों, राजस्व कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों को आपदा प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रशासनिक अधिकारी कलेक्ट्रेट देवेंद्र सक्सेना ने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आपदाएं अचानक आती हैं, लेकिन तैयारी और जागरूकता से नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। महिलाओं की भूमिका पर दी गई जानकारी कार्यक्रम में जिला आपदा विशेषज्ञ और मास्टर ट्रेनर्स ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संभावित आपदाओं, संवेदनशील क्षेत्रों और राहत कार्यों के मानकों पर चर्चा की। उन्होंने खास तौर पर महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर जोर देते हुए बताया कि महिलाएं जमीनी स्तर पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में बहुत अहम भूमिका निभा सकती हैं और समय पर मदद पहुंचा सकती हैं। फायर, मेडिकल और रेस्क्यू की दी गई ट्रेनिंग अग्निशमन अधिकारी आशीष मोहर ने आग लगने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई और बचाव के तरीके सिखाए। वहीं चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञानेंद्र चौहान ने बेसिक लाइफ सपोर्ट के तहत सीपीआर और प्राथमिक उपचार का प्रदर्शन किया। राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने फर्स्ट एड और बाढ़ प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही लघु फिल्मों और वीडियो के जरिए लोगों को आपदा के समय क्या करें और क्या न करें, यह भी समझाया गया। प्रतिभागियों को मिला सम्मान और लिया गया संकल्प कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के लिए प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले दस लोगों को सम्मानित किया गया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया, जिसमें प्रशिक्षण को काफी उपयोगी बताया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ और आपदाओं के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर काम करने का संकल्प लिया गया।

Leave a Reply