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प्रोग्राम में अफसरों की देरी मामले में आरोप-प्रत्यारोप:एसडीएम, पर्यटन अधिकारी और मंत्री के प्रतिनिधि के बीच फंसा पेंच

कन्नौज में मंत्री असीम अरुण की मौजूदगी वाले सरकारी कार्यक्रम में अफसरों के लेट पहुंचने के मामले में अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। अफसर और नेता लेटलतीफी की गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने लग गए। सरकार के 9 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर शहर के रोमा स्मारक में 26 मार्च की शाम कार्यक्रम होना था। इस कार्यक्रम का समय 5:30 बजे तय था, जिसमें समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण चीफगेस्ट थे। वह पत्नी ज्योत्स्ना के साथ तय समय में कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए, लेकिन वहां अफसर मौजूद नहीं थे। 45 मिनट इंतजार करने के बाद वह नाराज होकर वहां से चले गए। ये मामला सुर्खियों में आया तो जिम्मेदार अधिकारी और नेता लेटलतीफी की गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने लग गए। डीएम आशुतोष अग्निहोत्री का कहना है कि कार्यक्रम की आयोजक एसडीएम सदर वैशाली थीं। उनके 15 मिनट देरी से पहुंचने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। उधर डीएम को दिए स्पष्टीकरण में एसडीएम वैशाली ने बताया गया कि उस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी जिला पर्यटन अधिकारी डॉ. मोहम्मद मकबूल को बनाया गया था। जिन्होंने बताया कि मंत्री असीम अरुण 6:30 बजे आएंगे और डीएम 6 बजे आएंगे। जिसके आधार पर वह खुद 5:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गईं थीं, लेकिन तब तक मन्त्री असीम अरुण आ चुके थे।
उधर पर्यटन अधिकारी मोहम्मद मकबूल का कहना है कि उन्होंने मंत्री असीम अरुण के प्रतिनिधि विवेक पाठक को समय की सूचना दे दी थी, लेकिन उन्होंने मंत्री जी को कार्यक्रम लेट होने की जानकारी नहीं दी। अब इस मामले में विवेक पाठक ने डीएम आशुतोष मोहन के नाम पत्र लिखा और साथ मे मोबाइल की कॉल डिटेल का स्क्रीन शॉट भी शेयर किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि पर्यटन अधिकारी की ओर से कोई काल नहीं की गई, बल्कि मैंने खुद उन्हें कॉल कर मंत्री जी के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा कि पर्यटन अधिकारी द्वारा इस ब्लेम गेम में मुझे शामिल किया गया, जोकि गलत है। इस मामले की जांच कर सत्यता का पता लगाया जाए।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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