लखनऊ में रविवार को LGBTQIA (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीर, इंटरसेक्सुअल, असेक्सुअल) समुदाय के करीब 500 लोग सड़कों पर उतर आए। सभी ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026 के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए ‘काला बिल वापस लो’, ‘मेरी बॉडी, मेरी मर्जी’ के नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा- डॉक्टर हम लोगों में से किसकी-किसकी जांच करेंगे? सेक्स सबके पास है, फीलिंग अलग-अलग है। हम सेक्स के आधार पर नहीं बल्कि, फीलिंग से ट्रांस हैं। ये लोग जैसे ही बेगम हजरत महल पार्क से विधानसभा की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग कर रोक दिया। प्रदर्शन की 4 तस्वीरें… ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026 को समझिए इस बिल में कहा गया है कि जो लोग अपनी यौन अभिवृत्ति (सेक्सुअल ओरिएंटेशन) या अपनी पहचान (जेंडर आइडेंटिटी) को खुद महसूस करते हैं, उन्हें ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अपनी यौन अभिवृत्ति या जेंडर आइडेंटिटी को खुद तय करता है, तो उसे ट्रांसजेंडर नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि ट्रांसजेंडर की परिभाषा अब केवल उन लोगों तक सीमित कर दी गई है जो पहले से ही इस श्रेणी में हैं। प्रदर्शनकारी बोले- ‘हमें हिजड़ा समुदाय में नहीं जाना’ प्रदर्शन कर रहे शुभम अग्रहरि उर्फ सुरभि ने कहा नए बिल के हिसाब से हमें नंगा करके देखा जाएगा कि हम मेल हैं या फीमेल। पहले साइकैटरिस्ट हमें मेंटली प्रूफ करते थे। अब नए बिल के हिसाब से हम कपड़े उतारकर अपना **** दिखाएंगे और बताएंगे कि मेल हैं? ये बहुत गलत है। हम NALSA के जजमेंट को नहीं मान रहे। हम आगे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इस बिल से थर्ड जेंडर के लोग तनाव में हैं। हम लोगों को हिजड़ा कम्युनिटी में नहीं जाना है तो जबरदस्ती क्यों भेजा जा रहा। हमें ताली बजाकर भीख नहीं मांगना। हम अपनी बॉडी से संतुष्ट नहीं है इसलिए सर्जरी करवाते हैं। हमारे बहुत सारे लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हैं। महिला को पुलिस प्रोटेक्शन है, हमें तो पुलिस अभी प्रताड़ित करती है। ‘मेडिकल रिपोर्ट हमारी फीलिंग कैसे बताएगी’ प्रदर्शन कर रहीं ट्रांस वूमेन जिया ने कहा- यह बिल पूरी तरह गलत और हम लोगों के खिलाफ साजिश है। अब एक मेडिकल रिपोर्ट डिसाइड करेगी कि हमारी फीलिंग क्या है? क्या यह पुलिसवाले हमको सड़क पर खड़ा कर नंगा करके देखेंगे और बताएंगे कि हम ट्रांस हैं या नहीं? यह सरकार के द्वारा हमें पूरी तरह से अपमानित करने की साजिश है। हम इसके विरोध में हैं और रहेंगे। मेडिकल कराने में हमें कोई दिक्कत नहीं है अगर फिर 2019 में यह फैसला क्यों आया था कि समलैंगिक अपनी फीलिंग्स और अपने लोगों के साथ जी सकता है? हमें नंगा होकर दिखाना पड़ेगा कि हमारा जेंडर क्या है? आज तक किसी भी ट्रांस को सम्मान क्यों नहीं मिला? हमें घर बुलाकर कोई दावत क्यों नहीं खिलाता? ‘बिना बात या सुझाव के बिल संशोधन किया’ प्रदर्शन में लखनऊ के भरोसा ट्रस्ट के मैनेजर जतिन भी शामिल हुईं। यह ट्रस्ट LGBTQIA समुदाय के लिए काम करता है। जतिन ने कहा- बिना बात किए या सुझाव लिए ही ट्रांसजेंडर बिल-2019 में संशोधन कर दिया गया। इसमें हमारे प्रतिनिधियों को बुलाया भी गया तो उनसे ऐन वक्त पर मिलने से मना कर दिया गया। इनकी पर्सनल सेक्रेटरी से जब पूछा गया कि बिल में संशोधन के लिए आपको किन-किन बिंदु पर पूछने की जरूरत है तो उन्होंने कहा कि हमें इसकी जरूरत नहीं है। आखिर मैं पूछना चाहती हूं कि बिल में संशोधन करने वालों में कितने लोग हैं जो जानते हैं कि ट्रांस में कितने तरह के लोग शामिल हैं? ‘LGBTQ समाज से G को बिल्कुल अलग किया’ प्रदर्शन में शामिल गे प्रदर्शनकारी जतिन ने कहा- LGBTQ समाज से G को बिल्कुल अलग कर दिया है। सरकार के इस बिल में किन्नर समाज से जुड़ने के बाद ही आपको ट्रांसजेंडर माना जाएगा। जो व्यक्ति पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहता है, क्या उसका इस परंपरा से जुड़ना जरूरी है? सरकार इसके लिए बाध्य कर रही है। अगर कोई किन्नर पैदा हो रहा है तो सरकार उसे सर्टिफिकेट दे। अगर हमारा समुदाय सदन में होता तो इस तरीके का बिल न पास होता। किन्नर वेलफेयर बोर्ड से सरकार को इस संबंध में बात करना चाहिए। सर्वे कराया जाता, हम लोगों से बातचीत की जाती, तब इस बिल को लाया जाता। ———————- ये खबर भी पढ़िए- लखनऊ में सज-धजकर निकले ट्रांसजेंडर…VIDEO : सड़कों पर फ्लैग लेकर उतरे, एक-दूसरे को किस किया कोई दुल्हन की तरह सजा, तो किसी ने सोनपरी के कपड़े पहने। किसी ने चमकती-दमकती साड़ी पहनी, तो कोई लहंगे में। कोई बीच सड़क पर एक-दूसरे को किस करते हुए। लखनऊ के अंबेडकर पार्क से जब ट्रांसजेंडरों की परेड निकली, तो राह चलते लोग भी रुक गए। (पूरी खबर पढ़िए)

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