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सैफई दुष्कर्म मामले में विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला:गर्भपात के लिए कोर्ट से मांगी जाएगी अनुमति, जांच अधिकारी नियुक्त

इटावा के सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में मानसिक रूप से कमजोर बेसहारा महिला से दुष्कर्म के मामले में अब एक बड़ा फैसला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन पीड़िता की गर्भावस्था को देखते हुए उसका गर्भपात कराने के लिए कोर्ट से अनुमति लेने की तैयारी कर रहा है। तीन जांच समितियों की रिपोर्ट में महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के आधार पर यह सलाह दी गई है। मामले में आरोपी की पहचान भी हो चुकी है और पुलिस जांच जारी है। गर्भावस्था को लेकर कोर्ट में जाएगा मामला विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। मेडिकल जांच रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता करीब चार माह पांच दिन यानी लगभग 16 सप्ताह की गर्भवती पाई गई है। उसकी उम्र करीब 35 वर्ष बताई गई है। रिपोर्ट में उसकी मानसिक स्थिति और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गर्भपात कराने की सलाह दी गई है। इस पर सहमति बनाते हुए तय किया गया कि अब कोर्ट में आवेदन देकर अनुमति मांगी जाएगी और आगे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुसार की जाएगी।

जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई 18 मार्च को सामने आए इस गंभीर मामले के बाद विश्वविद्यालय ने तीन अलग-अलग जांच समितियां गठित की थीं, जिनमें मेडिकल, आंतरिक और प्रशासनिक टीमें शामिल थीं। सभी टीमों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिन पर कार्य परिषद की बैठक में मंथन किया गया। बैठक में अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की गई और आगे की जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए। आरोपी की पहचान और पीड़िता का बयान पुलिस जांच के तहत पीड़िता का बयान कोर्ट में दर्ज कराया गया। कानपुर से बुलाए गए अनुवादक की मदद से बयान की प्रक्रिया पूरी हुई। पीड़िता ने आरोपी सफाई कर्मी की फोटो देखकर उसकी पहचान की और इशारों में बताया कि उसके साथ तीन बार दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने आरोपी रविंद्र वाल्मीकि को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है और उसका डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। आईक्यू जांच और मानसिक स्थिति पीड़िता की मानसिक स्थिति को समझने के लिए उसका आईक्यू टेस्ट भी कराया गया, जिसमें उसका आईक्यू स्तर 38 प्रतिशत पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य व्यक्ति का आईक्यू करीब 75 प्रतिशत होता है। इस आधार पर डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर मानते हुए विशेष देखभाल और संवेदनशील निर्णय लेने की जरूरत बताई है। जांच अधिकारी नियुक्त, वीडियो रिकॉर्डिंग के निर्देश विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगे की विभागीय जांच के लिए सीएमएस प्रोफेसर डॉ. एसपी सिंह को जांच अधिकारी और राजकुमार सचवानी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया है। साथ ही पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले में हर कदम नियम और कानून के तहत उठाया जाएगा।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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