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गंगा में जलस्तर वृद्धि, किसानों की फसलें डूबीं:उन्नाव में गंगाघाट क्षेत्र में लाखों का नुकसान; किसानों ने मुआवजे की मांग की

उन्नाव के गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से तटीय किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी किनारे रेती पर उगाई गई सब्जियों की फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। पिछले दो दिनों में जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण कई बीघे में फैली फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। ककड़ी, खीरा, लौकी और तोरई जैसी मौसमी फसलें पानी में डूब गई हैं। ये फसलें किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत थीं और उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। बड़ी संख्या में किसान हर साल गंगा तट की रेतीली जमीन पर सब्जियों की खेती करते हैं। किसानों का आरोप है कि जलस्तर बढ़ने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई, जिसके कारण वे अपनी फसल या कृषि उपकरण सुरक्षित नहीं कर सके। उनकी फसलें कटाई के करीब थीं और बाजार में बेचने की तैयारी चल रही थी। अचानक आई इस आपदा ने उन्हें गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। कई किसानों ने लाखों रुपये के नुकसान का दावा किया है। स्थानीय किसानों ने बताया कि रेती की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च आता है, जिससे इसकी लागत अधिक होती है। फसल बर्बाद होने से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी अक्सर ऊपरी बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण होती है। हालांकि, समय रहते सूचना न मिलने से हर साल किसानों को ऐसा नुकसान झेलना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से पूर्व चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने की भी अपील की है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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