लखीमपुर खीरी के सिंगाही थाना क्षेत्र में कई दिनों से दहशत का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। इस तेंदुए ने एक 7 वर्षीय बच्ची को अपना निवाला बनाया था, जिसके बाद से पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल था। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। घर में खेल रही मासूम को उठा ले गया था तेंदुआ जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम फुटहा फार्म निवासी जोगा सिंह की इकलौती बेटी सिमरन (7 वर्ष) अपने घर में खेल रही थी। इसी दौरान अचानक झाड़ियों से निकलकर तेंदुआ घर में घुस आया और सिमरन को जबड़ों में दबाकर खेतों की ओर भाग निकला। परिजनों और ग्रामीणों के शोर मचाने के बावजूद तेंदुआ आंखों के सामने से गायब हो गया। काफी तलाश के बाद घर से कुछ दूरी पर मासूम का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की जानकारी पहले से होने के बावजूद समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने परिजनों को जल्द ही तेंदुए को पकड़ने का आश्वासन दिया था। 76 घंटे का मेगा सर्च ऑपरेशन और घेराबंदी डीएफओ कीर्ति चौधरी के निर्देश पर एसडीओ मनोज तिवारी के नेतृत्व में बेलरायां वन रेंज क्षेत्र के गांवों में अभियान चलाया गया। इस अभियान में 5 पिंजरे, 10 ट्रैप कैमरे और ड्रोन कैमरों का उपयोग कर लगातार निगरानी की जा रही थी। तेंदुए को पिंजरे में फंसाने के लिए बकरियों को चारे के रूप में भी बांधा गया था। वन विभाग की टीम पिछले 76 घंटों से बिना सोए इलाके की निगरानी कर रही थी। शनिवार रात करीब 11:30 बजे जैसे ही तेंदुआ शिकार के लालच में पिंजरे के भीतर दाखिल हुआ, वह कैद हो गया। इस ऑपरेशन में बेलरायां रेंजर भूपेंद्र सिंह और लुधौरी रेंजर मोबीन आरिफ की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तेंदुए के पकड़े जाने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। उन्होंने वन विभाग की टीम का आभार व्यक्त किया।

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