पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमाने वाली है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव 29 मार्च को दादरी के मिहिर भोज डिग्री कॉलेज के मैदान में बड़ी रैली करेंगे। सपा इस रैली को 2027 विधानसभा चुनाव का ‘शंखनाद’ बता रही है। इसके जरिए पश्चिमी यूपी के 32 जिलों की 140 विधानसभा सीटों पर शक्ति प्रदर्शन का दावा है। दादरी से ही अखिलेश बड़ी रैली की शुरुआत क्यों करने जा रहे? पश्चिमी यूपी में सपा का प्रदर्शन कैसा रहा है? पढ़िए रिपोर्ट… जानिए पश्चिमी यूपी सियासी नजरिए से क्यों महत्वपूर्ण 32 जिले, 140 सीटें… सत्ता की ‘चाबी’
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिमी यूपी की 140 विधानसभा सीटें यूपी की सत्ता तय करने में गेमचेंजर मानी जाती हैं। 32 जिलों में फैला यह क्षेत्र जातीय और धार्मिक समीकरणों का सबसे बड़ा केंद्र है। जाट, गुर्जर, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग यहां चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करते हैं। ध्रुवीकरण बनाम गठबंधन- यही यहां जीत-हार का सबसे बड़ा फैक्टर रहता है। गन्ना बेल्ट और किसान राजनीति का असर, मुद्दों को तेजी से चुनावी रंग देता है। दिल्ली-एनसीआर से सटे जिले (नोएडा, गाजियाबाद) शहरी वोट और भाजपा का मजबूत आधार हैं। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ जैसे इलाके सामाजिक समीकरणों के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। यहां मजबूत प्रदर्शन करने वाली पार्टी अक्सर लखनऊ की सत्ता तक पहुंचती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा), मुजफ्फरगनर, सहारनपुर, बुलंदशहर, बागपत, मुरादाबाद, रामपुर शामिल हैं, जो राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से इस क्षेत्र की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में 140 में से 96 सीटों के विश्लेषण की बात करें तो सपा-रालोद के हाथ करीब 36 सीटें आई थीं। तब रालोद के सपा का गठबंधन था। सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का मिला मंच
सपा इस रैली को केवल भीड़ जुटाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का बड़ा मंच मान रही है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश का हर वर्ग मौजूदा शासन से नाराज है। रैली में सरकार की नाकामियों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। सपा ने आरोप लगाया है कि सरकार विकास के बजाय विध्वंसात्मक राजनीति कर रही है। बुलडोजर नीति से लेकर सामाजिक ताने-बाने तक के मुद्दे उठाते हुए पार्टी का कहना है कि समाज को धर्म और जाति के आधार पर बांटा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह रैली प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की लहर पैदा कर सकती है। पीएम ने नोएडा में निशाना साधा, अब सपा करेगी पलटवार
सपा की रैली ऐसे समय में हो रही है, जब एक दिन पहले यानी 28 मार्च को पीएम मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया है। उद्घाटन के बाद सपा समेत विपक्ष पर निशाना साधा। पीएम ने कहा-सपा सरकार के दौरान पश्चिमी यूपी को लूट का एटीएम बना दिया गया था। मोदी ने आरोप लगाया कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना को सपा सरकार ने शुरुआती सालों में आगे नहीं बढ़ने दिया। भाजपा सरकार आने के बाद ही परियोजना को गति मिली, जिसकी बदौलत आज एयरपोर्ट तैयार हो पाया। नोएडा और अंधविश्वास पर सियासी वार
प्रधानमंत्री ने नोएडा से जुड़े पुराने अंधविश्वास का भी जिक्र करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले के मुख्यमंत्री नोएडा आने से डरते थे, क्योंकि यह माना जाता था कि यहां आने से सत्ता चली जाती है। उन्होंने इशारों में अखिलेश पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब उन्होंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल होने तक नहीं आए। पीएम मोदी के भाषण के बाद अखिलेश की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने X पर लिखा- हमारे प्रदेश में मेहमान बनकर आए हैं, हम उनको मेहमान मानकर ही सम्मान सहित विदा करेंगे। जाने वालों की बात का बुरा नहीं माना जाता है। जब हार साक्षात दिखने लगती है, तो इंसान को न अपने पद का मान रहता है, न ही अपने कथन पर नियंत्रण। उम्र और पद का मान करना हमारे संस्कार में है और हमेशा रहेगा। रैली बनाम नैरेटिव: 2027 की बिसात बिछनी शुरू
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, 2011 में अखिलेश ने पश्चिम से साइकिल यात्रा शुरुआत की थी। 2012 विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिला था। ऐसे में यह रैली और उसके जवाब में भाजपा के बयान 2027 चुनाव की बिसात बिछाने का संकेत हैं। सपा जहां जन असंतोष को मुद्दा बनाकर वापसी की कोशिश में है, वहीं भाजपा विकास और कानून-व्यवस्था के एजेंडे के साथ विपक्ष को घेर रही है। अब नजर 29 मार्च की रैली पर टिकी है। अगर सपा बड़ी भीड़ जुटाने में सफल होती है, तो यह पश्चिमी यूपी में उसके लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकती है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले-यूपी के पुराने CM नोएडा आने से डरते थे:अखिलेश का पलटवार- जब हार दिखती है, तो इंसान अपना पद भूल जाता है ‘नोएडा को पहले अंधविश्वास की वजह से उसके हाल पर छोड़ दिया गया था। कुर्सी जाने के डर से सत्ताधारी यहां आने से डरते थे। मुझे याद है, जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। मुझे आने का मौका मिला तो यहां के पुराने सीएम डर की वजह से नहीं आए। मुझे भी डराने की कोशिश की गई कि अभी-अभी पीएम बने हैं। यहां मत आइएगा, लेकिन मैं इस पवित्र धरती का आशीर्वाद लेने आया।’ पीएम मोदी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए शनिवार को ये बातें कहीं। पढ़ें पूरी खबर

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