चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित MSME एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव में इस बार नवाचार और स्टार्टअप्स की अनोखी झलक देखने को मिल रही है। कॉन्क्लेव में 35 हजार रुपए प्रति किलो कीमत वाले ‘मोरेल गुच्ची’ मशरूम ने खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। यह मशरुम हिमालय की पहाड़ियों में होता है। नौकरी छोड़ शुरु किया काम 60 लाख टर्नओवर
फरीदाबाद से आए उद्यमी संतोष राय के स्टॉल पर इस मशरूम का प्रदर्शन किया जा रहा है। संतोष की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। उन्होंने बताया कि 17-18 हजार रुपए की नौकरी में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। इसके बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग लेकर वर्ष 2018 में करीब 50-60 हजार रुपए निवेश कर अपना व्यवसाय शुरू किया। 8 साल के भीतर उनका कारोबार 50-60 लाख रुपए सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। हम महीने लाखों कमा रहे बातचीत में बताया कि अब वे हर महीने करीब एक लाख रुपए की आमदनी कर रहे हैं और लगभग 10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उनके स्टॉल पर 10 से अधिक प्रकार के मशरूम प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें एंटी-कैंसर गुणों वाला ‘शिटाकी’ मशरूम लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।
जिंदा मुर्गे से रखने से लेकर काटने तक की व्यवस्था वहीं, कॉन्क्लेव में कानपुर की एक कंपनी द्वारा तैयार की गई मोबाइल पोल्ट्री प्रोसेसिंग यूनिट भी लोगों को काफी पसंद आ रही है। इस यूनिट में जिंदा मुर्गों को रखने से लेकर काटने और बिक्री तक की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही, वेस्ट मैनेजमेंट के लिए अलग टैंक बनाया गया है, जिससे गंदगी बाहर नहीं फैलती।
1.25 -1.50 लाख रुपए कीमत यह यूनिट पूरी तरह मोबाइल है, जिसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। ई-रिक्शा के साथ इसकी कीमत करीब 1.25 लाख से 2 लाख रुपए के बीच बताई जा रही है।
कॉन्क्लेव में कृषि और लघु उद्योगों से जुड़े कई स्टार्टअप्स ने अपने उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया, जिससे युवाओं में स्वरोजगार और उद्यमिता के प्रति रुचि बढ़ती नजर आई।

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