लखनऊ के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में शनिवार को जयवर्धन लिखित नाटक ‘मध्यांतर’ का मंचन किया गया। सूर्या थिएटर कल्चरल आर्ट्स सोसाइटी ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से इस प्रभावशाली प्रस्तुति का आयोजन किया। नाटक का निर्देशन विवेक मिश्रा ने किया, जिसने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।’मध्यांतर’ शीर्षक दो लोगों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है, जो नाटक का केंद्रीय विषय है। यह प्रस्तुति रिश्तों में आने वाली इस दूरी के कारणों और उसके प्रभावों को संवेदनशीलता से उजागर करती है। घर की सारी जिम्मेदारी को दिखाया नाटक की कहानी पति-पत्नी ज्ञान और छाया के इर्द-गिर्द घूमती है। ज्ञान एक निजी ड्रामा स्कूल में अभिनय और निर्देशन सिखाता है। उनका सामान्य जीवन एक सड़क दुर्घटना से बदल जाता है, जिसमें ज्ञान का पैर टूट जाता है और वह अपाहिज हो जाता है। इस घटना के कारण उसकी नौकरी भी चली जाती है।इसके बाद घर की सारी जिम्मेदारी छाया पर आ जाती है। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब डॉक्टरों द्वारा यह बताया जाता है कि ज्ञान अब पिता नहीं बन सकता। यह सच उनके रिश्ते में धीरे-धीरे दरार पैदा करता है, जिससे साथ रहते हुए भी उनके बीच ‘मध्यांतर’ बढ़ता जाता है।यह नाटक संदेश देता है कि रिश्ते केवल स्वार्थ पर आधारित नहीं होते, बल्कि समर्पण और त्याग पर टिके होते हैं। प्रस्तुति में किसी भी प्रकार की अतिरंजना या अति नाटकीयता से बचा गया, जिससे भावनाओं की गहराई को सहज और प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा जा सका। कलाकारों ने अपने अभिनय से मंच पर जान डाल दी नाटक में छटपटाहट, आक्रोश, अपनापन, दूरी और बेबसी जैसे विभिन्न भावों का एक साथ प्रदर्शन किया गया। इसने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया और कहानी का हर दृश्य उनके मन में गहरा प्रभाव छोड़ गया।कलाकारों ने अपने अभिनय से मंच पर जान डाल दी। राहुल मिश्रा ने ज्ञान की भूमिका, एकता सिंह ने छाया की भूमिका, विवेक मिश्रा ‘विष्णु’ ने जयंत के किरदार और अनन्या सिंह ने लोरी के रूप में प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

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