उत्तर प्रदेश शासन के पंचायती राज विभाग ने पीलीभीत जिला पंचायत में कथित भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (AMA) धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस संबंध में विशेष सचिव जय प्रकाश पाण्डेय ने आदेश जारी किया है। धर्मेंद्र कुमार के विरुद्ध जिलाधिकारी पीलीभीत की जांच रिपोर्ट के आधार पर कई आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इन आरोपों में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर हेराफेरी शामिल है। एक आरोप के अनुसार, जिला पंचायत के अभियंता के अवकाश पर होने के बावजूद, 25 नवंबर 2025 को वित्तीय बिड खोलने के लिए उनके ‘डोंगल’ का अनाधिकृत उपयोग किया गया। इसके अतिरिक्त, 95 निर्माण कार्यों की ई-निविदा की तकनीकी बिड को बिना उचित परीक्षण के ही स्वीकृत कर दिया गया। ऑनलाइन प्रक्रिया में समिति के सभी अनिवार्य सदस्यों के हस्ताक्षर के बजाय केवल अपर मुख्य अधिकारी के हस्ताक्षरों से ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। टेंडर प्रक्रिया में श्रमिक पंजीकरण की अनिवार्य शर्त का भी खुलेआम उल्लंघन किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की स्वीकृति से आयुक्त, बरेली मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। शासन ने ‘उत्तर प्रदेश जिला पंचायत सेवा नियमावली-1970’ के सुसंगत नियमों के तहत धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। शासन की इस कार्रवाई से पीलीभीत जिला पंचायत में हड़कंप मच गया है। विशेष रूप से उन 95 निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठ गए हैं जिनकी निविदा प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण पाई गई है। शासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और विभागीय प्रक्रियाओं में हेराफेरी करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बरेली कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है, जिससे अन्य अधिकारियों के बीच भी कड़ा संदेश गया है। बरेली कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई होने की प्रबल संभावना है, जिससे अन्य अधिकारियों के बीच भी कड़ा संदेश गया है।

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